


आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेन्द्र राठौड़ ने ईडब्ल्यूएस में सरलीकरण की मांग को लेकर 13 फरवरी मंगलवार को जालौर में पत्रकारों से रूबरू हुए।
राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल की जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी संवैधानिक ठहराया है। उन्होंने कहा कि ये पहल तो अच्छी थी परन्तु ईडब्ल्यूएस में शामिल होने को लेकर जोड़ी गई जटिल शर्तों से इसका फायदा बहुत कम लोगों तक पहुंच पा रहा है।
उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस की प्रमुख शर्त जिसमें 5 एकड कृषि भूमि और एक निश्चित क्षेत्रफल से अधिक का मकान होने पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही अन्य वर्गों की तरह परीक्षार्थियों को आयु सीमा में कोई छूट नहीं दी गई है जिससे बड़ी संख्या में परीक्षार्थी इस लाभ के दायरे से बाहर हो रहे हैं।
आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन राठौड़ ने केन्द्र सरकार द्वारा भी राजस्थान मॉडल लागू करना चाहिए। राजस्थान में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की शर्तों में छूट देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले अचल संपत्ति की शर्त हटाई एवं बाद में परीक्षार्थियों को आयु सीमा और परीक्षा शुल्क में भी अन्य आरक्षित वर्गों की तरह लाभ देना शुरू किया। इससे राजस्थान में बड़ी संख्या में ईडब्ल्यूएस वर्ग में लाभार्थी शामिल हुए और उन्हें लाभ मिल सका।
आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि राजस्थान जैसे विशाल क्षेत्रफल वाले राज्य में 5 एकड कृषि की शर्त उचित प्रतीत नहीं होती है। केन्द्र सरकार के तमाम आयोगों की रिपोर्ट बता चुकी हैं कि राजस्थान जैसे राज्यों में 5-10 एकड़ कृषि भूमि वाले लघु एवं सीमान्त किसानों की आय प्रतिवर्ष एक लाख रुपए से भी कम होती है।