Saturday, 29 August 2026

इजराइली राजदूत के साथ कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की वार्ता- उद्यानिकी खेती में किसानों को मिलेगा इजराइली तकनीक का लाभ


इजराइली राजदूत के साथ कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की वार्ता- उद्यानिकी खेती में किसानों को मिलेगा इजराइली तकनीक का लाभ

राजस्थान में इजराइल के कृषि एवं उद्यानिकी में तकनीकी सहयोग हेतु कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बुधवार को सचिवालय में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन और इजराइली प्रतिनिधि मण्डल के साथ विस्तृृत चर्चा की। बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी वैभव गालरिया और उद्यानिकी आयुक्त लक्ष्मण सिंह कुड़ी भी उपस्थित रहे। 

राज्य में अंगूर व खजूर की खेती की संभावना और उच्च विद्युत चालकता (ई.सी.) एवं पी.एच. के जल से कृषि उत्पादन पर नवीन तकनीकी सहयोग के सम्बंध में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने  इजराइल के राजदूत के साथ हेतु विस्तृृत चर्चा की। कृषि मंत्री ने सवाई माधोपुर में उत्पादित किये जा रहे अमरूद के प्रसंस्करण के लिए सहयोग की संभावना पर कार्य करने हेतु कहा। इजराइल के राजदूत द्वारा इस पर आश्वस्त किया गया कि वे इस पर कार्य कर शीघ्र ही अवगत करायेंगे।

बैठक के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने इजराइल के तकनीकी सहयोग से स्थापित किये गये बस्सी एवं जयपुर में अनार, कोटा में सिट्रस तथा जैसलमेर में खजूर के उत्कृष्टता केन्द्रों की प्रगति से अवगत करवाया।  

उन्होंने बताया कि इन केन्द्रों पर इजराइल के तकनीकी विशेषज्ञों की देख-रेख में लगभग 2 हजार 500 हैक्टेयर क्षेत्र में उन्नत कृषि तकनीक के माध्यम से अनार, संतरा एवं खजूर की खेती की जाकर लगभग 15 हजार कृषकों को प्रशिक्षित किया गया है तथा 7 लाख 70 हजार कृषकों को पौध रोपण सामग्री उपलब्ध करवाई गई है।

उत्कृष्टता केन्द्रों पर अपनाई जा रही तकनीक पर इजराइली प्रतिनिधि मण्डल ने संतोष जाहिर कर बताया कि इजराइल के सहयोग से स्थापित तीनों उत्कृष्टता केन्द्र कृषकों के हित में कार्य कर रहे है तथा इन केन्द्रों पर कृषकों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही उच्च गुणवता युक्त पौध रोपण सामग्री कृषकों को उपलब्ध करवाई जा रही है। 

इजराइल के राजदूत ने कृषि मंत्री को आमंत्रित किया कि वे एक तकनीकी दल एवं किसानों के साथ इजराइल का भ्रमण करें, ताकि वे फल, फूल, सब्जी तथा अन्य बागवानी फसलों पर इजराइल द्वारा किये गये कार्याे का अवलोकन कर सके जिससे कृषि क्षेत्र में उन्नत तकनीकी की कार्य योजना बनायी जा सके।

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