Saturday, 29 August 2026

एमओयू केवल संस्थाओं के मध्य का सहयोग मात्र नहीं है, बल्कि हाशिए पर मौजूद लोगों की आवाज बुलंद करने और सकारात्मक बदलाव का आधार होना चाहिए: प्रो.पाणि


एमओयू केवल संस्थाओं के मध्य का सहयोग मात्र नहीं है, बल्कि हाशिए पर मौजूद लोगों की आवाज बुलंद करने और सकारात्मक बदलाव का आधार होना चाहिए: प्रो.पाणि

हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्यों के छात्र छात्राओं को डिजिटल कौशल और उभरती टेक्नोलॉजी में दक्ष करने के लिए डॉ. बी आर अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सोनीपत और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के बीच एमओयू  हुआ।  

एमओयू समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज डीन प्रोफेसर बलराम पाणि मुख्य अतिथि रहे। विधि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अर्चना मिश्रा एवं राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक प्रोफेसर मदन मोहन त्रिपाठी के बीच एमओयू  करार हुआ। 

कार्यक्रम में  कल्चरल मंत्रालय केंद्र सरकार के डायरेक्टर ज्वाला प्रसाद, नाइलिट के डायरेक्टर शमीन खान,  एनआईईएलआईटी के कार्यवाहक कुलसचिव रजनीश कुमार, डॉ बी आर अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ रामफूल शर्मा और डीन व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आशुतोष मिश्रा मंचासीन रहे। दीप प्रज्वलन एवं विश्वविद्यालय कुलगीत से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 

कुलपति प्रो. अर्चना मिश्रा ने कहा इस एमओयू साइन के तहत डॉ. बीआर अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, साइबर सुरक्षा, डेटा एवं टेक्नोलॉजी, साइबर कानून जैसी अनेक विशेषताओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए स्लेबस शुरू किए जायेंगे। 

प्रो. मिश्रा ने कहा कि इस कार्यक्रम से हमारे छात्रों एवं शिक्षकों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। यह समझौता भारतीय शैक्षिक नीति ढांचे और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है। जो अनेक कौशल आधारित क्षेत्रों में युवाओं की क्षमता व कौशल निर्माण पर जोर देता है। दोनों संस्थानों की इस साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य उद्योग और शिक्षा जगत में छात्र छात्राओं को इंटर्नशिप, प्लेसमेंट, फिल्ड विजिट, वर्कशॉप एवं सम्मेलनों के माध्यम से उद्योग, सरकारी पेशे एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए तैयार करना है। यह सहयोग विश्वविद्यालय के छात्रों के कौशल विकास के लिए अत्यधिक फायदेमंद होगा। यह हमारे छात्रों को इंटर्नशिप से गुजरने में सक्षम बनाएगा जो अब इसका एक हिस्सा है। 

प्रो. बलराम पाणि ने कहा दोनों संस्थान एक दूसरे को सहयोग करते हुए उच्च शिक्षा के नए आयामों पर ले जाने की प्रतिबद्धता हो। यह एमओयू केवल संस्थाओं के मध्य का सहयोग मात्र नहीं है बल्कि हाशिए पर मौजूद लोगों की आवाज बुलंद करने और सकारात्मक बदलाव का आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा शोध के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से एक रिसर्च आधारित स्लेबस को बढ़ावा मिलता है। रिसर्च छात्रों के अनुभव को विकसित करता है और रोजगार क्षमता में सुधार करता है, रिसर्च की संस्कृति को समृद्ध करता है।

डायरेक्टर ज्वाला प्रसाद ने कहा देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। इससे कार्य स्थल पर शिक्षक और छात्रों में आवश्यक कौशल में तेजी से अनुकूल बदलाव होंगे। अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक ही सीमित नहीं होने चाहिए बल्कि इससे समाज को कुछ ना कुछ संदेश मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा इस प्रौद्योगिकी के युग में जीवन जी रहे है, उन्हें समाज की सोच को बदलने के लिए आगे आना चाहिए। विकसित भारत बनाने के लिए समाज के एक-एक व्यक्ति का योगदान आवश्यक है। इसलिए सबको विकसित राष्ट्र बनाने की सोच के साथ कार्य करते हुए अपना योगदान देना है। 

सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलसचिव रजनीश कुमार ने कहा दोनों संस्थानों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई साझेदारी को विकसित करेंगे। अनुबंधित शर्तों के अनुसार समय-समय पर पूर्णकालिक और अल्पकालिक अवधि के कोर्सेस भी करवायेंगे। साथ ही दोनों संस्थाएं मिलकर शोध परिकल्पनाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए भी प्रयासरत रहेंगे। यह समझौता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को आगे बढ़ाने और अनुसंधान की उत्कृष्टता के माध्यम से ज्ञान के प्रसार और विकास के नए कीर्तिमान  स्थापित किया जाएगा। 

प्रोफेसर त्रिपति ने कहा छात्रों को प्रेजेंटेशन के जरिए सेल्फ लर्निंग, योग्य और अनुभवी फ़ैकल्टी, अनुसंधान कार्य, केस स्टडीज और विश्लेषण, रोल प्ले एवं सिमुलेशन अभ्यास, मल्टीमीडिया क्लासरूम, सॉफ्ट स्किल्स, इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट, सांस्कृतिक विविधता, कैंपस प्लेसमेंट सहायता से पढ़ने व उनके कल्चर को सीखने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम का संचालन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पूजा जायसवाल ने किया। अंत में कुलसचिव डॉ रामफूल शर्मा एवं डीन प्रोफेसर आशुतोष मिश्रा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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