Saturday, 29 August 2026

नेट थियेट पर विरासत संगीत,संतो ऐसा देश हमारा जाने जानन हारा


नेट थियेट पर विरासत संगीत,संतो ऐसा देश हमारा जाने जानन हारा

नेट थियेट कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज अजीतगढ़ सीकर निवासी कलाकार रामस्वरूप शेखावाटी ने विरासत संगीत कार्यक्रम के तहत शेखावाटी पारंपरिक संगीत का परचम फहराया। 

नेटथियेट के राजेन्द्र शर्मा राजू ने बताया कि शेखावाटी के सुप्रसिद्ध गायक बिहारी कथक के सानिध्य में संगीत की शिक्षा प्राप्त रामस्वरूप शेखावाटी ने अपने कार्यक्रम की शुरूआत राग हंस ध्वनि तीन ताल सोलह मात्रा में गुरू वंदना संत रामदास की रचना प्रथम करूं गुरूदेव को वंदन प्रस्तुत कर अपनी शास्त्रीय गायिकी का परिचय दिया। इसके बाद उन्होनें राग केदार पर आधारित ताल कहरवा आठ मात्रा की बंदिश सुरभी करले मेरे मना बीती उमर हरिनाम बिना सुनाई। राग भीम पलासी, राग माढताल, राग पहाडी में ताल कहरवा आठ मात्रा की तीन रचनाएं जिनमें फकीरा साहेब लगता प्यारा, संतो ऐसा देस हमारा जाने जानन हारा और अंत में *संतो देखो नजर पसार इन काया पर रेल चले*को बड़े ही मनोयोग से गाकर कार्यक्रम को उचाइया दी । इनकी गायिकी में शेखावाटी के सुप्रसिद्ध कलाकार बिहारी कथक की गायिकी की छवि देखने को मिली। इनके साथ तबले फिरोज बिहानी ने अपनी उंगलियों का ऐसा जादू बरसाया की लोग वाह-वाह कर उठे। 

कार्यक्रम संयोजक नवल डांगी, संगीत सागर गढवाल, कैमरा मनोज स्वामी, प्रकाश जिवितेश शर्मा, मंच सज्जा अंकित शर्मा नोनू की रही।



    Previous
    Next

    Related Posts