Saturday, 29 August 2026

शिक्षा में सकारात्‍मक परिवर्तन देश में जन आंदोलन बने: देवनानी


शिक्षा में सकारात्‍मक परिवर्तन देश में जन आंदोलन बने: देवनानी

राजस्‍थान विधानसभा अध्‍यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि भारत की सनातन परम्‍परा विश्‍व के लिये प्रेरणा स्‍त्रोत है। भारतीय शिक्षा ने विश्‍व में राष्‍ट्र की पहचान बनाई है। शिक्षा बंधनों से मुक्‍त करती है। राष्‍ट्र के विकास का आधार शिक्षा है। शिक्षा में किये जा रहे सकारात्‍मक परिवर्तन देश में जन-आंदोलन बने, इसके लिए सभी को सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्‍यकता है। 

राजस्‍थान विधानसभा अध्‍यक्ष देववानी मंगलवार को अग्रवाल कॉलेज के सभागार में शिक्षा संस्‍कृति उत्‍थान न्‍यास द्वारा आयोजित शिक्षा में भारतीयता- व्‍यवस्‍था परिवर्तन विषयक प्रबुद्वजन गोष्‍ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा में नई तकनीक का समावेश होना चाहिए। भारतीयता के अनुरूप पाठ्यक्रम और शिक्षा पद्धती में परिवर्तन आज की आवश्‍यकता है। इस कार्य में शिक्षकों का सहयोग जरूरी है। 

 देवनानी ने दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर गोष्‍ठी का शुभारम्‍भ किया। उन्‍होने कहां कि भारत के गौरवशाली इतिहास को युवा पीढी को समझाना होगा। दैनिक जीवन में शिक्षा की सार्थकता है। भारत से भारतीयता को समाप्‍त नहीं किया जा सकता। लोगों की दृढ इच्‍छा शक्ति के कारण भारतीय संस्‍कृति अटल रही है। श्री देवनानी ने सभी के लिये समान शिक्षा की आवश्‍कता प्रतिपादित करते हुए कहां कि स्‍वावलम्‍बन और स्‍वाभिमान को जाग्रत करने वाली शिक्षा का प्रसार जरूरी है। 

गोष्‍ठी में दत्‍तात्रेय होसबोले ने कहां कि शिक्षा विवेक जाग्रत करती है। शिक्षा के महत्‍व को समझे। भारत की शिक्षा भारतीय केन्द्रित होनी चाहिए, इसके लिए सभी को प्रयास करने होगे। नई शिक्षा नीति से राष्‍ट्र में नया वातावरण का निर्माण हो रहा है। समाज में सकारात्‍मक परिवर्तन, चरित्र निर्माण और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों का हल भी भारतीय ज्ञान परम्‍पराओं से हो रहा है। उन्‍होने कहां कि व्‍यक्ति जीवन की चुनौति का उत्‍तर भारतीय शिक्षा में है। नई शिक्षा नीति से अनुकूल वातावरण बन रहा है। हम कर सकते है, ऐसा विश्‍वास नई पीढी में, नई शिक्षा नीति पैदा कर रही है। इससे तैयार होने वाली प्रतिबद्ध पीढी, मानव प्रेम की भावना समाज में विकसित करेगी, जिससे विश्‍व में भारत मॉडल बन सकेगा। 

न्‍यास के राष्‍ट्रीय सचिव अतुल भाई कौठारी ने कहां कि शिक्षा में भारतीयता पर आज भी चितंन की आवश्‍यकता है। भारतीय दर्शन से भारतीय जीवन द्ष्टि का निर्माण हुआ है। भारतीय मूल्‍य निर्मित हुए है। व्‍यवहार में भारतीय मूल्‍यों का आचरण करने वाले भारतीय संस्‍कृति के पर्याय बने है। उन्‍होने कहां कि भारत का ज्ञान समृद्ध है। योग भारतीय संस्‍कृति की देन है। योग को विश्‍व के अनेक देशों ने अपनाया है। आज दुनिया की सोच बदल रही है। दुनिया भारतीय शिक्षा की और अग्रसर है। देश दुनिया की चुनौतियों का समाधान भारतीय ज्ञान परम्‍परा में है। भारतीय ज्ञान परम्‍परा पर दुनिया में अनेक शोध व अनुसंधान हो रहे है। 

भारतीय विश्‍वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्‍तल ने कहां कि बच्‍चो के चरित्र निर्माण के लिये प्रयास करने होगे। समाज को बढावा देने वाले शोध किये जाने की आवश्‍यकता है। वैदिक गणित भारतीय शिक्षा की देन है। समाज का विकास का दायित्‍व विश्‍व विद्यालयों पर है। 

स्‍वागत नितिन कांसलीवाल ने और आभार श्री सुरेश अग्रवाल ने ज्ञापित किया। गोष्‍ठी में अनेक विश्‍वविद्यालयों के कुलपतिगण, प्रशासनिक अधिकारीगण और शिक्षाविद् मौजूद थे। 



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