Saturday, 29 August 2026

पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था राजस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट कमलेश सक्सेना के नेतृत्व में जवाहर सर्किल गार्डन में प्रातः भ्रमण के दौरान लोगों को केंद्र के नए कानूनों की जानकारी देकर किया जागरूक


पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था राजस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट कमलेश सक्सेना के नेतृत्व में जवाहर सर्किल गार्डन में प्रातः भ्रमण के दौरान लोगों को केंद्र के नए कानूनों की जानकारी देकर किया जागरूक

26 दिसंबर को पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था राजस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट कमलेश सक्सेना के नेतृत्व में जवाहर सर्किल गार्डन में प्रातः काल 6:30 से 8:00 बजे तक भ्रमण किया और लोगों को केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए कानूनों की जानकारी दी कि किस तरह से ये कानून जनता के लिए नुकसानदायक है लोगों ने ध्यान से सुना और कई सवाल पूछे उन सब को जवाब देकर संतुष्ट किया कि ये कानून देश हित में नहीं है।

नए कानून जो बनाए गए हैं वो जनता के लिए बहुत बड़ी मुसीबत हो गई है और न्यायालय का काम बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा

नए कानून बनाने में इतनी जल्दबाजी की गई है कि जनता के लिए, वकीलों के लिए, मजिस्ट्रेट और जजों के लिए,सरकारी वकीलों के लिए और पुलिस के लिए बहुत बड़ी आफत होने जा रही है। पता नहीं हमारे द्वारा चुने हुए सांसदों ने बिना इन पर विचार किए बिल पास कर दिया। 

कुछ उदाहरण दे रहा हूं क्योंकि मुझे पूरे कानून पढ़ने और समझने के लिए तो बहुत समय लगेगा और न्यायालय को भी इनको इंटरप्रेट करने में कई साल लगेंगे और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का काम बहुत अधिक बढ़ जाएगा।

पहले अपराधी को गिरफ्तार करने के 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना पड़ता था वह नए कानून में नहीं है दूसरा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करते हैं उसकी एक प्रति न्यायालय को भेजनी होती थी जिसकी अब जरूरत नहीं है। तीसरा गिरफ्तार करने के पश्चात पहले मजिस्ट्रेट अधिकतम 15 दिन का पुलिस रिमांड दे सकता था लेकिन अब नए कानून के तहत 90 दिन तक पुलिस वाले किसी को भी गिरफ्तार रख सकते हैं और क्योंकि ने कानून के तहत एफआईआर की कॉपी तुरंत मजिस्ट्रेट को भेजने के नियम नहीं है इसलिए वह कब गिरफ्तार करेंगे और कब गिरफ्तारी दिखाएंगे यह पुलिस के हाथ में है। पहले अपराधी को गिरफ्तार करने पर उसकी चोटों का मुआयना करवाया जाता था ताकि यह मालूम पड़ सके उसके कितनी चोटें हैं और बाद में कितनी चोटें आती है अब मुलजिम की चोटों के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी नहीं है।

देशद्रोह कानून के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसको खत्म करना चाहिए उस कानून को तो खत्म कर दिया लेकिन राजद्रोह कानून इतना विस्तृत बना दिया कि किसी भी व्यक्ति को राजद्रोह के कानून में गिरफ्तार किया जा सकता है यह पुलिस पर निर्भर करता है।

अब सबसे बड़ी मुसीबत यह है की हर वकील को, हर पुलिस वाले को हर मजिस्ट्रेट और जजों को और लॉ कॉलेज के प्राध्यापकों को सारे कानून दोबारा पढ़ने पढ़ेंगे जिसमें बहुत समय लगेगा और न्यायालय का काम बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।

क्योंकि गजट नोटिफिकेशन हो गया है इसलिए सारे कानून लागू हो गए हैं क्योंकि सारी धाराएं बदल दी गई है इसलिए अब पुलिस वालों को यह समझ नहीं आएगा किसको किस धारा में गिरफ्तार किया जाए उन सब की ट्रेनिंग जरूरी हो गई।

सारे मजिस्ट्रेट और जजों के लिए वकीलों के लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट को तुरंत प्रसंज्ञान लेकर रोक लगानी चाहिए और इन पर दोबारा विचार करने के लिए केंद्र सरकार को भेजना चाहिए। 

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