


केकड़ी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण संख्या 2 की अदालत ने केकड़ी निवासी जयप्रकाश की मृत्यु से संबंधित दावा याचिका का निस्तारण करते हुए वाहन की बीमा कम्पनी इफ्को टोक्यो के खिलाफ अवार्ड पारित करते हुए 9.75 लाख की क्षतिपूर्ति राशि अदा करने के आदेश पारित किए हैं।
मृतक के परिजनों के अधिवक्ता डॉ. मनोज आहूजा ने बताया कि दिनाँक 13 जुलाई 2016 को सुबह मृतक जयप्रकाश अपने भाई प्रदीप के साथ कार संख्या आर जे 06 सीबी 7831 को चलाकर केकड़ी से कादेड़ा जा रहा था समय करीब सुबह साढ़े आठ बजे जब वह भराई पेट्रोल पम्प के पास पहुंचा कि सामने से एक मारुती वैन जिसके नंबर आर जे 09 यू ए 3477 थे,के चालक ने अपनी वैन को तेज गति व लापरवाही से चलाते हुए अपनी सही दिशा को छोड़कर मृतक की गाड़ी के सामने आ गया जिस पर मृतक ने स्वंय को बचाने के लिए ब्रेक लगाए तो गाड़ी सड़क के नीचे उतर गई और पलटी खा गई जिसकी वजह से मृतक के शरीर पर चौटें कारित हुई और उसे हॉस्पिटल में मृत घोषित कर दिया गया।
उक्त घटना की पुलिस थाना केकड़ी में प्राथमिकी दर्ज कर बाद अनुसंधान आरोपी वैन चालक के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई।प्रार्थीगण के अधिवक्ता डॉ.मनोज आहूजा ने उक्त दस्तावेजों के आधार पर याचिका प्रस्तुत करते क्षतिपूर्ति राशि की मांग की वहीं याचिका के लंबित रहने के दौरान मृतक की माता पिता की भी मृत्यु हो गई।जिस पर बीमा कम्पनी के अधिवक्ता ने वाहन की मिथ्या लिप्तता का अभिवचन लेते हुए दुर्घटना मृतक की स्वंय की लापरवाही से होने तथ पुलिस से मिलीभगत कर बीमित वाहन के खिलाफ चालान पेश करने के अभिवचन प्रस्तुत किये तथा मृतक के भाई को प्रथम श्रेणी का वारिसान नहीं होने एवं मृतक पर आश्रित नहीं होने का तर्क देते हुए हुए याचिका ख़ारिज करने की प्रार्थना की।
जिसका खंडन करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ.मनोज आहूजा ने खंडन करते हुए कहा कि घटना के दो घंटे बाद ही रिपोर्ट दर्ज करवा दी गई थी जिसमें बाद अनुसन्धान मारुती के चालक की लापरवाही मानी जाकर चार्जशीट प्रस्तुत हुई है जिसके खंडन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हुई है।जहां तक याचिका के लंबित रहने के दौरान माता पिता की मृत्यु होने की बात है तो व्यवस्थाओं का खामियाजा पक्षकार नहीं भुगतेगा के सम्बन्ध में हाई कोर्ट का न्यायिक दृष्टांत प्रस्तुत किया गया।बीमा कम्पनी द्वारा उठाई गई आपत्तियों को साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप साबित नहीं किया गया है।
तर्कों से सहमत होते हुए न्यायाधीश ने बीमा कम्पनी को क्षतिपूर्ति अदायगी के लिए उत्तरदायी मानते हुए नौ लाख पिचत्तर हजार तथा याचिका प्रस्तुत करने की दिनाँक से ब्याज की राशि अधिकरण के समक्ष जमा करवाने के निर्देश पारित किए हैं।दुर्घटना के सात साल बाद अवार्ड पारित होने पर पीड़ित परिवार को राहत मिली है।