


सुखदेव सिंह शेखावत मूल रूप से हनुमानगढ़ जिले के भादरा कस्बे के गोगामेड़ी गांव के रहने वाले थे। इसलिए वे नाम के पीछे हमेशा 'गोगामेड़ी' लगाते थे। उनका परिवार गोगामेड़ी गांव से करीब 1 किलोमीटर दूर खेत में बनी ढाणी में रहता था। पिता अचल सिंह शेखावत का देहांत हो चुका है। तीन भाइयों में अब केवल सबसे बड़े भाई दिलीप सिंह शेखावत ही बचे हैं, जो गोगामेड़ी में ही दुकान चलाते हैं। बीमारी के चलते सालभर पहले सबसे छोटे भाई कानसिंह की मौत हो चुकी है।
की पत्नी शीला कंवर भादरा में साहवा बस स्टैंड के नजदीक स्थित मकान में रहती हैं। वकालत की पढ़ाई करने वाली शीला शेखावत खुद भी राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना में सक्रिय रही हैं।
सुखदेव सिंह शेखावत ने भादरा सीट से वर्ष 2013 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था। 34 हजार वोट लेकर वे तीसरे स्थान पर रहे थे। विधानसभा चुनाव वर्ष 2023 में सुखदेव सिंह कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे। टिकट नहीं मिला तो उनकी पत्नी शीला शेखावत ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नॉमिनेशन किया था। हालांकि बाद में उन्होंने नामांकन वापस ले लिया था।
सुखदेव सिंह करणी सेना में वर्ष 2006 से ही सक्रिय थे। वर्ष 2008 में जब जोधा-अकबर फिल्म का विरोध शुरू हुआ तो सुखदेव ने बढ़-चढ़कर आंदोलनों में हिस्सा लिया। अपने भाषणों से भीड़ जुटाई तो उनकी पहचान राजपूत नेता के तौर पर बनी।
भादरा (हनुमानगढ़) स्थित सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर के बाहर जमा भीड़। हत्याकांड के बाद पैतृक गांव में भी सन्नाटा पसरा है।
करणी सेना से अलग होकर राजपूत करणी सेना का गठन करने वाले लोकेंद्र सिंह कालवी ने सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस संगठन से प्रदेशभर में लाखों युवा जुड़ गए थे। बाद में सुखदेव गोगामेड़ी का लोकेंद्र सिंह कालवी से विवाद हो गया था। इसके बाद उन्होंने श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना नाम से अलग संगठन बना लिया था।
पद्मावत फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली वर्ष 2017 में जयपुर के जयगढ़ फोर्ट में फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। यह फिल्म चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मावती और मुगल सम्राट अल्लाउद्दीन खिलजी पर थी। इस पर राष्ट्रीय श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखेदव सिंह गोगामेड़ी ने विरोध शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि फिल्म में रानी पद्मावती के किरदार के साथ छेड़खानी कर राजपूतों की गलत इमेज पेश की जा रही है।
सुखेदव सिंह गोगामेड़ी और उनके संगठन के कार्यकर्ता 28 जनवरी 2017 को जयगढ़ फोर्ट में शूटिंग का विरोध करने गए। तभी उग्र हुई भीड़ ने सेट पर तोड़फोड़ कर दी और इसी दौरान किसी कार्यकर्ता ने संजय लीला भंसाली को थप्पड़ मार दिया। फिल्म के क्रू मेंबर के साथ भी मारपीट की गई। इस विरोध प्रदर्शन के बाद संजय लीला भंसाली और उनकी टीम मुंबई लौट गई थी। इसके बाद सुखदेव चर्चा में आए थे।
जब फिल्म की रिलीज अनाउंस हुई तो जनवरी 2018 में श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, श्री राजपूत करणी सेना के संयोजक लोकेंद्र सिंह कालवी और प्रदेशाध्यक्ष महिपाल मकराना के नेतृत्व में देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए।
जबरदस्त विरोध के चलते भंसाली ने अपनी फिल्म में कई बदलाव किए थे। फिर भी इस फिल्म की रिलीज तक भारी बवाल होता रहा। यहां तक कि फिल्म की रिलीज के दिन 25 जनवरी 2018 को देश के कई राज्यों में कर्फ्यू लगाया था।
इस फिल्म के विरोध में गुड़गांव, हैदराबाद, गुजरात, बिहार, जम्मू, करनाल, कुरुक्षेत्र, नोएडा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, सूरत आदि जगहों पर तोड़फोड़ की गई थी। 23 जनवरी 2018 को करणी सेना के करीब 2000 लोगों ने अहमदाबाद के चार मॉल्स में तोड़फोड़ की थी। 50 से अधिक गाड़ियों को फूंक दिया था।
गैंगस्टर आनंद पाल सिंह का पुलिस ने 24 जून 2017 को चूरू के मालासर गांव में एनकाउंटर कर दिया था। इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए करणी सेना के तीनों संगठन ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए प्रदेश भर में विरोध-प्रदर्शन किए थे।उसे समय सुखेदव सिंह गोगामेड़ी भी अपने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर गांव सांवराद (नागौर) पहुंचे। एनकाउंटर का जमकर विरोध किया। इस आंदोलन ने बाद में हिंसा का रूप ले लिया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी। कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
सुखदेव सिंह अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के कारण हमेशा विवादों में रहे। यही कारण था कि उनकी लोकेंद्र सिंह कालवी से भी नहीं बनी। सुखदेव सिंह के खिलाफ प्रदेश के अलग-अलग थानों में 21 मामले दर्ज थे। इनमें 7 गंभीर आपराधिक मामले हैं। वर्ष 2003 में उन्हें हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। वर्ष 2013 में आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। वर्ष 2017 में सुखदेव पर रेप का मामला दर्ज हुआ था।