


हाईकोर्ट ने असुरक्षित दूध बेचने को लेकर जयपुर पुलिस द्वारा जयपुर डेयरी चेयरमेन ओम पूनिया , महाप्रबंधक चांद मल वर्मा सहित उच्च अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी में कोई भी दंडात्मक कार्यवाही करने पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने यह आदेश जयपुर डेयरी, जयपुर डेयरी चेयरमेन ओम पूनिया और महाप्रबंधक चांद मल वर्मा सहित की याचिकाओं पर दिया। डेयरी के अधिवक्ता डॉ. अभिनव शर्मा ने न्यायालय को बताया की पुलिस को फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्यवाही करने की शक्ति प्राप्त नहीं है इसे में खाद्य विभाग के निर्धारित अधिकारी द्वारा ही प्रॉसिक्यूशन किया जा सकता है और पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
शर्मा ने बताया की जयपुर डेयरी उच्चतम गुणवत्ता का दूध और दूध उत्पाद बनाती है। राजनीति रूप से छवि खराब करने के लिए यह मुकदमा बनाया था। साथ ही जहां से सैंपल लिया है वहां से दूध की बिक्री नहीं की जाती है। जिस टैंकर से दूध का नमूना उठाया गया था उस पर स्पष्ट लिखा होता है "मिल्क नाट फॉर सेल" ऐसे के बिना परिष्कृत दूध के नमूने के आधार पर पूरी जयपुर डेयरी के खिलाफ अपराधिक मुकदमा बना देना गलत और नियम विरुद्ध है।
ज्ञात हो की 17 नवंबर को मुखबिर की सूचना के आधार पर कौथून डेयरी पर पुलिस ने एक टैंकर जप्त किया जिससे लिए गए सैंपल में मारी हुई मक्खियां और अपशिष्ट पाया गया था साथ ही कौथून डेयरी के चिलिंग प्लांट से लिए सैंपल में भी धूल कण पाए गए थे। जिस पर पुलिस ने जयपुर डेयरी के चेयरमैन एमडी सहित क्वालिटी कंट्रोल अधिकारी व विजिलेंस अधिकारियों को मिलावटी दूध बेचना बताते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। डेयरी चेयरमेन ओम पूनिया के दूध को सुरक्षित बताने वाले बयान के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गाया था।