


राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने जीत हार को लेकर समीक्षा का काम शुरू कर दिया है। 3 दिसंबर को परिणामआएंगे यही कारण है कि दोनों पार्टी के शीर्ष नेताओं ने सरकार के गठन से पहले की प्रक्रिया को लेकरअपने बागी उम्मीदवारों से संपर्क साधने का काम शुरू कर दिया है।
भाजपा के जानकारों का दावा है कि उन्हें 75 सीटों पर जीत मिल जाएगी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेता भी दावा कर रहे हैं कि उन्हें 60 सीट तो मिलेगी ही जबकि 50 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीचसीधी टक्कर मानी जा रही है । जबकि कई पर लड़ाई त्रिकोणीय है। दोनों दल इन सीटों पर जीत-हार का अंतर कम रहने का अनुमान लगा रहे हैं। बहुमत तक पहुंचने के लिए भाजपा को इनमें से 28 सीटें जीतनी होंगी जबकि कांग्रेस के लिए ये संख्या 35 सीटें जितना आवश्यक होगा।
भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि इस बार के विधानसभा के चुनाव में लगभग 20 सीटें अन्य के खाते में जाएंगी। यदि कांटे की टक्कर की सीटों में भी अन्य ने बढ़त बनाई तो ये संख्या बढ़ भी सकती है। मतदान में 2018 के मुकाबले महज 0.74 प्रतिशतकी बढ़ोतरी का नफा-नुकसान न तो भाजपा को समझ आ रहा है और न ही कांग्रेस को। दोनों दल इसे अपने पक्ष और विरोधी के खिलाफ होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि उन्हें यह आशंका भी है कि कहीं ऐसा मतदान के लिए पिछली बार से 2 घंटे ज्यादा का समय देने और बुजुर्गों को घर पर वोट देने की सुविधा की वजह से तो नहीं हुआ।
भाजपा के नेताओं का कहना है कि कांटे की टक्कर की 50 सीटों में से कम से कम 60 प्रतिशत पर जीत मिलेगी। इससे कुल सीटों का आंकड़ा 100 हो जाएगा। यदि 80 प्रतिशत सीटें जीती तो ये 115 पर पहुंच जाएगा। हालांकि भाजपा का एक आकलन यह भी है ध्रुवीकरण, महिला अपराध और पेपर लीक पर साइलेंट वोटिंग हुई होगी तो सभी समीकरण ध्वस्त हो जाएंगे और पार्टी को 125 के आसपास सीटें मिलेंगी।
कांग्रेस के बड़े नेताओं का मानना है कि कड़े मुकाबले की 47 सीटों में से कम से कम 70 प्रतिशत पर समीकरण उसके पक्ष में हैं। इन सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार जीत हासिल करते हैं तो पार्टी की सीटों की संख्या 98 तक पहुंच जाएगी। यदि 80 प्रतिशत सीटें जीती तो आंकड़ा 100 हो जाएगा। कांग्रेस का एक अनुमान यह भी है कि कर्मचारियों और महिलाओं की उन्हें अच्छी संख्या में वोट दिए हैं इसलिए जीत और बड़ी हो सकती है।
विधानसभा के वर्ष 2018 में हुए चुनाव परिणाम की समीक्षा की जाए तो उसे समय प्रदेश में 29 सीटों पर जीत का अंतर 5 हजार से कम रहा था। भाजपा ने इनमें से 14 और कांग्रेस ने 12 पर जीती, जबकि 3 सीटें अन्य को मिली। इन 29 सीटों में 9 पर जीत का अंतर 1 हजार से कम, 7 पर 2 से 1 हजार, 4 पर 3 से 2 हजार व 9 पर 4 से 3 हजार के बीच रहा था।