


श्रीकरणपुर से कांग्रेस विधायक और प्रत्याशी गुरमीतसिंह कुन्नर का निधन दिल्ली के एम्स अस्पताल में हो गया है । उनके बेटे रूबी कुन्नर ने इसकी पुष्टि की।
कुन्नर को किडनी की तकलीफ के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया था।
कुन्नर ने एम्स में बुधवार सुबह 4 बजे अंतिम सांस ली। कुन्नर को इसी सप्ताह ब्रेन अटैक के बाद पहले एसएमएस अस्पताल और फिर एम्स में भर्ती करवाया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
गुरमीत कुन्नर के निधन के बाद अब करणपुर सीट पर 25 नवंबर को चुनाव आयोगद्वारा मतदान स्थगित कर दिया जाएगा। ठीक एक महीने बाद इस सीट पर अब चुनाव आयोग बाद में चुनाव करवाएगा। प्रदेश में लगातार यह तीसरा चुनाव है जब सभी 200 सीटों पर एक साथ मतदान नहीं होगा। इससे पहले वर्ष 2013 में चूरू से बसपा उम्मीदवार का निधन होने के कारण वर्ष 2018 में रामगढ़ से एक उम्मीदवार का निधन होने के कारण 199 सीटों पर ही चुनाव हुए थे।
कुन्नर ने राजनीति की शुरुआत ग्राम पंचायत 25 बीबी के सरपंच के रूप में की। वहां से अलग-अलग पदों पर रहते हुए उन्होंने पहली बार वर्ष 1998 में श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीते। वर्ष 2003 के चुनाव में पराजित होने के बाद पार्टी ने वर्ष 2008 में उन्हें टिकट नहीं दिया। इस पर बागी होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद गहलोात सरकार में कृषि विपणन राज्यमंत्री भी रहे। साल 2013 में वे चुनाव हारे और वर्ष 2018 में एक बार फिर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
गुरमीत सिंह कुन्नर तीन बार विधायक रहे। पहली बार वर्ष 1998 में में कांग्रेस की टिकट विधायक बने। वर्ष 2003 में विधानसभा का चुनाव हार गए। वर्ष 2008 में टिकट कटने पर बागी होकर निर्दलीय चुनाव जीते। गहलोत सरकार को समर्थन दिया, उन्हें कृषि विपणन मंत्री बनाया गया। वर्ष 2013 का चुनाव हार गए, वर्ष 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते।