


टोंक जिले में अंतर्राष्ट्रीय कला कार्यशाला "आर्टइको 2023" का टोंक में आयोजित कार्यक्रम का समापन एपीआरआई टोंक में हुआ ।
रूस के कलाकारों द्वारा टोंक जिले के ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण पर जाकर बनाई गई उनकी पेन्टिंगों की चित्रकला के प्रर्दशन के साथ समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य आज अतिथि श्रेयांसी मनु ,सेरगे खावालोव ,रूसी चित्रकार क्ज़ेनिआ द्रोज़्द ,यूजीनि लोबानोव रहे ।समापन समारोह की अध्यक्षता मौलाना आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान के निदेशक मुजीब अता आजाद ने की, विशिष्ट अतिथि के शिक्षाविद गोवर्धन हिरोनी, शिक्षाविद रमेश काला, प्रदीप शर्मा, रूपनारायण चौधरी, भागचंद वैष्णव रहें।
समारोह में निदेशक मुजीब आजाद ने कहा कि रूस और भारत मैत्री राष्ट्र रहे हैं ऐसे में रूस के कलाकारों द्वारा टोंक की सभ्यता संस्कृति एवं स्थापत्य कला पर चित्रकला का प्रदर्शन करना गौरव का विषय है, आजाद ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए देश के रक्षा मंत्री रहे वी कृष्णा मेनन की चर्चा की तथा कहा चित्रकला के माध्यम से कलाकारों ने सीमाओं की दूरी को कम करने का काम किया है। बिना शब्दों के चित्र अपने आप में कहानी कहते है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से मौलाना जमील, मोहम्मद आरिफ, मुरलीधर अरोड़ा, खलील दादा, आसिफ खान, चित्रकार ताराचन्द शर्मा, नरेन्द्र साहू, शैलेन्द्र शर्मा, फैसल हसनी,
गयास खुर्रम, सैयद शाहीन अफरोज, प्रशांत जैन, निहाल आरिश, गिरधर सिंह, डॉ. मदन गुर्जर बाल कलाकार मेहूल गुर्जर, प्रतुल गुर्जर महेश गुर्जर, शेख यावर हबीब चित्रकार
इत्यादि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।बच्चों द्वारा योगा का जोरदार प्रर्दशन किया।
रूस के चित्रकारों ने टोंक जिले के ककोड किला, बावड़ी, शाही जामा मस्जिद, चतुर्भुज तालाब, हाथी भाटा, अन्नपूर्णा मन्दिर, बनास पुलिया, पक्का बन्धा सहित अनेक ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर चित्र बनाये। उन चित्रों का प्रदर्शन एपीआर आई में आयोजित चित्रकला प्रर्दशनी में हुआ। कलात्मक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के इस उत्सव में 5 विदेशी और भारतीय कलाकार, अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक-सांस्कृतिक कला परियोजना "आर्टईको" में भाग लेने के लिए टोंक में एकत्रित हुए। कार्यशालाओं और एक प्रदर्शनी से युक्त यह तीन दिवसीय प्रयास, वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने में कला की शक्ति का एक प्रमाण है। परियोजना के मुख्य आकर्षण के रूप में, ये प्रतिभाशाली कलाकार अपने काम का लाइव प्रदर्शन किया टोंक जिले के निजी विद्यालयों में जाकर बच्चों की कला कार्य देखकर चर्चा और डेमो भी दिया चर्चा भी की।
चित्र बनाने वाले कलाकारों में पांच रुसी कलाकार सेरगे खावालोव ,क्ज़ेनिआ द्रोज़्द, यूजीनि लोबानोव , ओल्गा लेवचेंको और अक्सेंटिव सर्गेई। भारत से ग़ज़ल प्रताप और श्रेयांसी मनु जैसे प्रसिद्ध कलाकार सम्मलित हुए।
कार्यक्रम के सह-आयोजक श्रेयांसी इंटरनेशनल आर्ट एंड कल्चर ऑर्गनाइजेशन की प्रबंध निदेशक श्रेयांसी सिंह मनु का मानना है कि "आर्टईको" में इस क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम बनने की क्षमता है, जो जीवन के सभी क्षेत्रों से कला प्रेमियों और पारखी लोगों को आकर्षित करेगा। उन्होंने छात्रों और युवाओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कला के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए परियोजना के मिशन को व्यक्त किया। उसी के तहत टोंक जिले मे तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ भविष्य में ऐसे आयोजन होते रहेगे।
टोंक में कार्यक्रम समन्वयक महेश गुर्जर ने बताया कि टोंक जिले बनाई गई चित्रों की प्रर्दशनी रूस देश में आयोजित होगी जिसमें टोंक जिले के ऐतिहासिक स्थलों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पेन्टिंग के माध्यम से विदेशी लोगो को देखने का अवसर मिलेगा। यह पर्यटन की दृष्टि से अच्छा होगा और विदेशी मेहमान टोंक जिले ऐतिहासिक स्थलों भ्रमण के लिए ज्यादा से ज्यादा आयेगें।
"आर्टईको" एक अद्वितीय सांस्कृतिक उत्सव है, जिसमें अन्तरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी शामिल है और यह इस कार्यक्रम की वैश्विक अपील को रेखांकित करता है।उन्होंने इस बात पर बल दिया कि "आर्टईको" न केवल कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक मंच के रूप में बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए उत्प्रेरक के रूप में भी कार्य करता है। इसके साथ उन्होंने पारिस्थितिक और विरासत संरक्षण दोनों के प्रति समर्पण के लिए कलाकारों की सराहना की।