Saturday, 29 August 2026

पर्यटकों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए अवकाश के दिनों में भी खुला रहेगा एपीआर आई: मुजीब अता आजाद


पर्यटकों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए अवकाश के दिनों में भी खुला रहेगा एपीआर आई: मुजीब अता आजाद

विश्व विख्यात मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान के निदेशक मुजीब अता आजाद ने  कहा कि देश- विदेश से आने वाले पर्यटकों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए एपीआरआई अवकाश के दिनों में भी खुला रहेगा। इस बाबत निदेशक ने  आदेश जारी करते हुए संस्थान में कार्यरत कार्मिकों को पाबन्द कर निर्देश दिए हैं कि बाहर से आने वाले आगंतुकों की अगवानी के लिए संस्थान सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी खुला रहेगा।

नवनियुक्त निदेशक मुजीब अता आजाद ने पत्रकारों से कहा कि मानवता के हित में स्वतन्त्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के शान्ति और अहिंसा के संदेशों को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आजाद ने कहा कि संस्थान मौलाना आजाद के जीवन दर्शन से जुड़े तथ्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। संस्थान में संसाधनों की कमी की चर्चा करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में ही संस्थान की बेहतरी के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। संस्थान की योजनाओं में मौलाना अबुल कलाम आजाद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित म्यूजियम की स्थापना करना भी शामिल है। मुजीब आजाद ने कहा कि नई सरकार में सेवा नियमों और रिक्त पदों पर नियुक्ति के सार्थक प्रयास किए जाएंगे।

आजाद ने दोहराया कि टोंक के मशहूर और मारूफ अदीबों के दानदाता परिजनों द्वारा संस्थान को दान की गई पुस्तकें साहित्य जगत की अनमोल धरोहर है, जो पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित है। उर्दू, अरबी, फारसी, प्राकृत भाषा समेत अन्य बेशकीमती किताबों का जखीरा संस्थान में मौजूद है। आजाद ने संस्थान को दुर्लभ पुस्तकें दान करने वाले वारिसान को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे जब चाहें तब उनके द्वारा दान की गई पुस्तकों का अवलोकन कर सकते हैं। साथ ही पुस्तकों के साथ फोटो खिंचवा सकते हैं ताकि उनके अहसास बरकरार रहें। संस्थान दुर्लभ पुस्तकों का जिम्मेदार केयर टेकर है, जो तमाम वारिसान को इज्जत से ये अहसास दिलाता है कि उनके विद्वान पूर्वजों का बेशकीमती अदबी सरमाया मुकम्मल तौर पर इदारे में महफूज है।

आजाद ने कहा कि देश भर के विश्वविद्यालयों से आने वाले रिसर्च स्कॉलर्स के शोध पत्रों का प्रकाशन संस्थान में किया जाएगा तथा पारदर्शी व्यवस्था के अनुरूप नियमानुसार शोधार्थियों को सीधे उनके खातों में भुगतान किया जाएगा। संस्थान इस बात को लेकर भी संकल्पित है कि पर्यटन की दृष्टि से इदारे को वीआईपी जोन में तब्दील किया जाए। आजाद ने बताया कि संस्थान को विभिन्न अकादमियों से जोड़ने के आधिकारिक पत्र लिखे जा चुके हैं। आजाद ने एक माह में सभी जनरल प्रकाशित करने की बात दोहराते हुए बताया कि संस्थान ने देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर सेमिनार और व्याख्यान के साझा कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया है। जिस दौरान संस्थान के डॉ. सैयद बदर अहमद, मोहम्मद आरिफ, मौलाना जमील, सत्यनारायण सेन, केसर मियां, फैसल हसनी, गीताराम गुर्जर, श्याम बिहारी गौतम, मुरलीधर अरोड़ा आदि मौजूद थे।

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