Saturday, 29 August 2026

महिला शक्ति का विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक से अधिक योगदान हो और इसके लिए उनकी भागीदारी बढ़ाए जाने की जरूरत : प्रो. टीजी सीताराम


महिला शक्ति का विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक से अधिक योगदान हो और इसके लिए उनकी भागीदारी बढ़ाए  जाने की जरूरत : प्रो. टीजी सीताराम

एआईसीटीई के अध्यक्ष  प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा कि देश की आवश्यकता है कि आने वाले समय में महिला शक्ति का विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक से अधिक योगदान हो और इसके लिए उनकी भागीदारी बढ़ाई जाने जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाए। जिससे भारत की प्रगति तेजी से हो पाएगी।

शनिवार को कूकस में स्थित विज्ञान भारती राजस्थान द्वारा जयपुर में आर्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में विभा स्थापना दिवस समारोह प्रवीण रामदास की मौजूदगी में मुख्य अतिथि के रूप में एआईसीटीई के अध्यक्ष  प्रोफेसर टीजी सीताराम उन्होंने कहा कि कहा कि भारत ने विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति की है। लेकिन इन सबके बावजूद अब देश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के अनुरूप अपनी योजना बनाकर काम करने की जरूरत है। 

प्रथम सत्र का उद्घाटन सुबह 10:00 बजे दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ शुरू हुआ।  सभी अतिथियों का साफा और शाल द्वारा स्वागत किया । आर्या कालेज के छात्र और छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया ।  कार्यक्रम के सम्पूर्ण परिचय का दायित्व विज्ञान भारती राजस्थान के सचिव  डॉ. मेघेन्द्र शर्मा द्वारा संम्पन हुआ। 

कार्यक्रम के मुख्या वक्ता राष्ट्रीय बौद्धिक प्रमुख  स्वांत रंजन थे।  उन्होंने बताया कि सत्येंद्र नाथ बोस इस बात के पक्षधर थे कि विज्ञान मातृभाषा में ही पढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि महान  वैज्ञानिक  पी सी रे के द्वारा बंगाल फार्मास्युटिकल्स की स्थापना की ताकि समाज आत्मनिर्भर बन सके और विज्ञान और समाज साथ साथ चल सके. उन्होंने कहा कि हमें अपने भूतकाल का गौरव, वर्तमान की पीड़ा तथा भविष्य के सपने लेकर चलना है तभी समाज उन्नत एवं समृद्ध होगा।  

विभा राष्ट्रीय सचिव प्रवीण रामदास द्वारा विभा की पृष्ठभूमि एवम संपूर्ण गतिविधियों से विद्यार्थियो सहित सभी गणमान्य अतिथियों का ध्यान विज्ञान भारती की ओर आकर्षित किया 

आर्य कॉलेज में संपन्न इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित शैक्षणिक हस्तियों, वैज्ञानिक समुदाय और सरकारी निकायों के प्रतिनिधियों सहित उल्लेखनीय हस्तियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथिओ आरटीयू के कुलपति प्रो. एसके सिंह, पूर्व महानिदेशक मौसम विज्ञान, भारत सरकार डॉ. एलएस राठौड, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण रामदास, बीटीयू के कुलपति प्रोफेसर अंबरीश एस विद्यार्थी, एसकेएनएयू - जाबनेर के कुलपति प्रोफेसर बलराज सिंह, एनआईए के कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा, राजस्थान यूनिवर्सिटी  की कुलपति प्रोफेसर अल्पना कटेजा, और जेएनवीयू के पूर्व कुलपति  प्रोफेसर पीसी त्रिवेदी ने कार्यक्रम के महत्व पर बल दिया। साथ ही उन्होंने  भारत के इतिहास में विज्ञान और स्वतंत्रता के विषय पर अपने अपने विचार रखे, जिससे देश की आजादी के ऐतिहासिक संघर्ष और वैज्ञानिकों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की जन मानस में गहरी समझ विकसित की जा सके। यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए विशेषज्ञों के साथ जुड़ने, सीखने और प्रोफेसर एसएन बोस की जीवन से प्रेरणा लेने का एक अनूठा अवसर साबित हुआ। 

शनिवार 21 अक्टूबर को विज्ञान भारती अपना स्थापना दिवस भी मना रही  है , इस अवसर पर  विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण रामदास ने विज्ञान भारती के स्वदेशी विज्ञान के जनजन तक पहुंचाने की कल्पना का रोड मैप पर चर्चा प्रस्तुत किया। साथ ही भारतीय विज्ञान और भारत के लिए विज्ञान पर अपने विचार रखे। उन्होंने अंग्रेजो द्वारा भारत के विकास के मिथक को एक सिरे नकारा।  डॉ. पी सी त्रिवेदी ने कविताओं के द्वारा नवयुवको को उत्साहित किया।  पूर्व महानिदेशक मौसम विज्ञान, भारत सरकार डॉ. एलएस राठौड जी ने नवाचारों के लिए युवको का आह्वान किया। अन्य वक्ताओं ने देश के ज्ञान का देश के जन मानुष के लिए प्रभावी उपयोग पर बल दिया।प्राचीन विज्ञान और आधुनिक विज्ञान के सम्मलित अनुप्रोग की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।  इस अवसर पर विज्ञान भारती के न्यूज़ लेटर का अनावरण किया गया।  

इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित व्यक्तियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए, लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया, इनमे डॉ. एल.एस. राठौड़ (पूर्व महानिदेशक, आईएमडी), डॉ. आरएस परोदा (पूर्व महानिदेशक, आईसीएआर, भारत सरकार), और डॉ. एनके जोशी (पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक, बीएआरसी मुंबई) , शिक्षा विद श्रीमती लता रावत कैंब्रिज कोर्ट स्कूल ग्रुप, प्रो ऋषि सिंघल HOD फिजिक्स ,राजस्थान विश्वविद्यालय शामिल थे। 

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत के प्रख्यात वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक संस्थानों पर आधारित प्रदर्शनियाँ रही । इसके अलावा स्कूल और कॉलेज के छात्रों द्वारा परियोजनाएं और नवाचार मॉडल का प्रदर्शन भी किया ।  देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे सीएसआईआर-सीईईआरआई-पिलानी, कृषि विज्ञान केंद्र, आईसीएआर -डीआरएमआर-भरतपुर  ने भी अपने कार्यो को आम जन तक पहुंचने के लिए प्रदर्शनियाँ लगा थी । इन प्रदर्शनियों का आनंद आगंतुकों  ने पूरे दिन लिया। आगंतुक छात्रों और छात्राओं को एनपी राजीव, उपाध्यक्ष, एनआईएफ, और डॉ. बी लाल गुप्ता  द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र देखने का भी अवसर मिला । 

सर्वाधिक आकर्षण विज्ञान शिक्षक सशक्तिकरण बैठक (STEM ) का था, जिसमे स्कूल और कॉलेज के शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, स्टार्टअप और विज्ञान तथा इंजीनियरिंग के छात्रों को शिक्षित करने के लिए विभिन्न शैक्षिक तरीको की जानकारी प्रदान गयी । छात्रों को डॉ. आरएस परोदा, डॉ. एनके जोशी, डॉ. पीसी पंचारिया, प्रो. बीआर गुर्जर, प्रो. बीएल स्वामी, और डॉ. ए. लेनिन फ्रेड  जैसे कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षकों के साथ जुड़ने का एक अनूठा अवसर भी प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन विज्ञान भारती के वरिष्ठ सदस्यों शैलेश जैन, अंजु और डॉ. शंकर बाबू ,  डॉ. उमेश गुप्ता ने किया। सभी प्रतियोगिताओ का मूल्याङ्कन कर, विजेताओं को पुरुस्कृत किया गया।  

कार्यक्रम के समापन में डॉ. एलएस राठौड़, प्रवीण रामदास, डॉ. पीसी पंचारिया, एनपी राजीव, डॉ. ब्रजेश पांडे, प्रो. अंबरीश विद्यार्थी, डॉ. मेघेंद्र शर्मा, और इंजी अनुराग अग्रवाल  सहित प्रमुख हस्तीओ को एक मंच पर आने का अवसर प्रदान हुआ। यह कार्यक्रम एक शैक्षिक और ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान करने में सफल हुआ और आशा हैं कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वैज्ञानिकों के योगदान का जश्न मनाने के लिए प्रसिद्ध विद्वानों, वैज्ञानिकों और छात्रों को एक साथ लाकर उनमे एक नयो ऊर्जा का संचार कर पायेगा। अंत में आर्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड आईटी के चेयरमैन इंजी अनुराग अग्रवाल, आरटीयू के कुलपति प्रो. एसके सिंह और विज्ञान भारती राजस्थान के लगभग 200 आजीवन कार्यकर्ताओ एवं सभी गण्यमान अतिथिओ का कार्यक्रम में पधारने के लिए धन्यवाद दिया।  


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