Saturday, 29 August 2026

राजस्थान हाईकोर्ट का प्लेटिनम जुबली समारोह, सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे शुभारंभ, आम अधिवक्ताओं को आमंत्रण नहीं, विरोध में लिखा पत्र


राजस्थान हाईकोर्ट का प्लेटिनम जुबली समारोह, सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ करेंगे शुभारंभ, आम अधिवक्ताओं को आमंत्रण नहीं, विरोध में लिखा पत्र

राजस्थान हाईकोर्ट का प्लेटिनम जुबली समारोह शनिवार को शुरू होगा। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ शनिवार को शाम 4:30 बजे जयपुर एग्जिबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में प्लेटिनम जुबली समारोह का शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्थल भी मौजूद रहेंगे। गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संदीप मेहता भी समोराह में शिरकत करेंगे।

वहीं 29 अगस्त 2024 को राजस्थान हाई कोर्ट के 75 वर्ष पूर्ण होने पर जोधपुर में इसका समापन होगा। समारोह में हाई कोर्ट से जुड़े 17 सेवानिवृत न्यायाधीशों को भी आमंत्रित किया हैं। इनमें  हाईकोर्ट के सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिल देव सिंह, सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसएन झा, सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस के मित्तल, सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसएस शिंदे शामिल हैं। सेवानिवृत न्यायाधीश जस्टिस पीबी मजूमदार, जस्टिस जयश्री ठाकुर, जस्टिस एएस ग्रेवाल, जस्टिस निर्मलजीत कौर,जस्टिस सबीना, जस्टिस बीजे शेथना,जस्टिस रामेश्वर व्यास, जस्टिस केएस अहलूवालिया,जस्टिस चांदमल तोतला, जस्टिस एचआर पंवार को समारोह के लिए आमंत्रित किया हैं।

शुभारंभ के कार्यक्रम से आम अधिवक्ताओं को दूर रखा गया हैं। हाई कोर्ट प्रशासन ने समारोह में हाई कोर्ट न्यायाधीश, बार काउंसिल के सदस्य, विभिन्न बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को ही कार्यक्रम का निमंत्रण भेजा है। जिसके विरोध में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव प्रहलाद शर्मा और अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने सीजेआई और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अपना विरोध जताया हैं। अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने कहा कि बहुत शर्म की बात है की हाई कोर्ट के स्थापना दिवस में आम वकीलों को आमंत्रित नहीं किया है। जबकि हाईकोर्ट का मतलब ही बार और बेंच है अगर बार नहीं है तो बेंच क्या करेगी और राजस्थान हाई कोर्ट के वकीलों का तो स्वर्णिम इतिहास रहा है यहां के एडवोकेट जो जज बने हैं उनमें से कई सुप्रीम कोर्ट गए हैं सबसे पहले सिंघल साहब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे फिर एनएम कासलीवाल,सुरेश अग्रवाल,अशोक माथुर, सिंघवी,आरएम लोढ़ा,अजय रस्तोगी, दिनेश माहेश्वरी, और आर एम लोढ़ा सब तो सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बने।

अधिवक्ता जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति बने हैं और अधिवक्ता चौधरी साहब कानून मंत्री बने और अधिवक्ता दलवीर भंडारी साहब तो अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जज बने। इस हाई कोर्ट की गरिमा को बढ़ाया है लेकिन स्थापना दिवस के महत्व पूर्ण कार्यक्रम में अधिवक्ताओं को नहीं बुलाना अधिवक्ताओं का अपमान करना है मैं तो कहता हूं कि जहां कार्यक्रम है वहां प्रदर्शन करना चाहिए विरोध प्रकट करना चाहिए और बार को आज ही प्रस्ताव पारित कर देना चाहिए कि वह भी किसी कार्यक्रम में जजों को आमंत्रित नहीं करेंगे और हाईकोर्ट के द्वारा किए गए किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे 15 अगस्त 26 जनवरी और दीवाली मिलन समारोह हाईकोर्ट आयोजित करते हैं ।15 अगस्त और 26 जनवरी को हम उपस्थित होंगे लेकिन अल्पाहार ग्रहण नहीं करेंगे और दीवाली मिलन समारोह में कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं होगा और हाईकोर्ट जज के रेफरेंस में भी कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं होगा यह प्रस्ताव आज ही पारित करके और मुख्य न्यायाधीश को देना चाहिए।

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