


हाईकोर्ट की खंडपीठ के न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव और प्रवीण भटनागर ने जनहित याचिका के तर्कों से सहमति जताते हुए चिकित्सा विभाग को निर्देश दिए हुए कहा कि करौली शहर में स्थित पुराने सरकारी अस्पताल में शहर के लोगों को चिकित्सा सुविधा देने की व्यवस्था को कायम रखा जाए। इसके अलावा चिकित्सा विभाग ने नया सैटेलाइट अस्पताल के लिए भवन बनाया है उसमें भी नए तरीके से चिकित्सा की सुविधा प्रदान की जाए।
सवाई माधोपुर निवासी कैलाश ने अपने अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी, डॉ. टी एन शर्मा एडवोकेट और नीलेश बुरड़ एडवोकेट के जरिए हाई कोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत कर निवेदन किया कि करौली शहर से 8 किलोमीटर दूर नया सैटेलाइट अस्पताल बनाया है और पुराने अस्पताल को बंद करने का निर्णय लिया है जो जनहित में नहीं है।
जनहित याचिका में लोगों को होने वाली परेशानियों का जिक्र कर कहा कि शहर के लोग इलाज करवाने के लिए 8 किलोमीटर दूर जायेंगे वह संभव नहीं है। जनहित याचिका में कहा गया कि शहर में भी जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और वहां अस्पताल की अत्यधिक आवश्यकता है ऐसी स्थिति में इस अस्पताल को बंद करना जनहित में नहीं है।
वहीं दूसरी चिकित्सा विभाग द्वाराने याचिका का जवाब देते हुए कहा की शहर में पहले से ही दो डिस्पेंसरियां चल रही हैं और यह अस्पताल बहुत पुराना हो चुका है और मरीजों की संख्या बढ़ रही है और ज्यादा ऑपरेशन होना संभव नहीं है इसलिए नया सैटेलाइट अस्पताल पूर्ण सुविधाओं के साथ बनाया है और जनता के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग ने व्यवस्था कर रखी है की शहर से सेटेलाइट हॉस्पिटल जाने के लिए मामूली दर पर यातायात सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।