Saturday, 29 August 2026

हाई कोर्ट ने पूछा जल एवं स्वच्छता संस्थान ने सीएजी से ऑडिट क्यों नही ? नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में मांगा जवाब


हाई कोर्ट ने पूछा जल एवं स्वच्छता संस्थान ने सीएजी से ऑडिट क्यों नही ? नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में मांगा जवाब

राजस्थान सरकार के विभाग जल एवं स्वच्छता संस्थान के द्वारा नियंत्रक एवं ओडिटर जनरल भारत सरकार द्वारा जांच नहीं करवाने पर पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई। 

संस्था की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी एवं एडवोकेट टी एन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि जल एवं स्वच्छता संस्थान को सैंकड़ो करोड़ का सरकारी फंड दिया गया था मगर जल एवं स्वच्छता संस्थान जो एक सरकारी संस्थान है और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीन कार्य करता है। 

इस संस्थान को राज्य तथा केंद्र सरकार से काफी बजट मिलता है और अरबों रुपए खर्च करने के बाद सरकारी संस्था से ऑडिट नहीं करवाता है जबकि सीएजी act की धारा 14(1) के अनुसार जिस सरकारी संस्थान को राज्य सरकार या केंद्र सरकार से 25 लाख से अधिक का फंड मिलता है तो उसकी सीएजी ऑडिट आवश्यक हैं l साथ ही राज्य सरकार के नियम GF & AR के नियमो के अनुसार राज्य के सभी फंड की ऑडिट राज्य सरकार के विभाग से करवाया जाना आवश्यक हैं लेकिन जल एवं स्वच्छता संस्थान को सैंकड़ो करोड़ का सरकारी फंड दिया गया था मगर जल एवं स्वच्छता संस्थान  ने जानबूझकर ओडिटर जनरल भारत सरकार से जांच नहीं करवाई और एक प्राइवेट चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट करवा कर इतिश्री कर ली।  जबकि राज्य सरकार के GF &AR या सीएजी act के बारे में प्राइवेट चार्टर्ड अकाउंटेंट को कोई जानकारी नहीं है, संस्था ने राज्य सरकार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जल एवं स्वच्छता संस्थान व सीएजी को लीगल नोटिस दिया था लेकिन संस्थान ने कोई जवाब नहीं दिया और इस प्रकार करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया है।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जल एवं स्वच्छता संस्थान और सीएजी को कारण बताओ नोटिस जारी किया हैं और तीन सप्ताह हफ्ते में जवाब मांगा हैं l


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