


प्रदेश भाजपा की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने जयपुर और धौलपुर राजघराने का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। 15 साल पहले जयपुर की पूर्व राजकुमारी दिया कुमारी धौलपुर की पूर्व महारानी और पूर्व वसुंधरा राजे के सामने राजनीति में आने के लिए याचना कर करती थी।लेकिन समय बदला और परिस्थितियों ने दिया कुमारी को पहले सवाई माधोपुर से विधायक और अब राजसमंद से सांसद बनने का मौका मिला।
यही नहीं उन्हें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.सतीश पूनिया ने प्रदेश भाजपा में महामंत्री बनाया। अब पीएम मोदी भी पसंद करते हैं। ऐसे में दिया कुमारी का राजनीतिक भविष्य उज्जवल होता नजर आ रहा है। यह भी माना जा रहा है कि उन्हें विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है। जयपुर के दादिया ग्राम पंचायत में परिवर्तन संकल्प महासभा के संचालन में भूमिका निभाने वाली दिया कुमारी ने सोमवार को जो कुछ किया वह राजनीति में एक चर्चा का विषय बन गया है।प्रदेश नेतृत्व ने पीएम मोदी की परिवर्तन संकल्प महासभा में मौजूद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सीएम राजे की राजनीतिक हैसियत को बिखरने का श्रेय प्राप्त हुआ।
पीएम मोदी की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को पीएम से पहले बोलने का मौका दिया और वसुंधरा को जान बूझकर नीचा दिखाने के लिएआम लोगों के सामने नहीं बोलने दिया। भाजपा की यह नई राजनीतिनिश्चित तौर पर वसुंधरा राजे के भविष्य को चौपट करने वाली है।अब चाहे कुछ भी हो लेकिन सोमवार कोपीएम मोदी की परिवर्तन संकल्प महासभा में जो कुछ घटा वह निश्चित तौर पर आने वाले राजनीति को नया संदेश देने वाला है।अब यह तय हो गया है किपीएम मोदी औरकेंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह वसुंधरा राजे और उनके समर्थकों को विधानसभा के चुनाव में ज्यादा अहमियत देने वाले नहीं है।
भाजपा के नए राजनीतिक समीकरणों में आए बदलाव सेचर्चा जोरों पर है कि आने वाला भविष्य वसुंधरा और उसके समर्थकों काअच्छा नहीं रहेगा।जयपुर की राजकुमारी और राजसमंद से सांसद दिया कुमारी का राजनीतिक भविष्य उज्जवल होता नजर आ रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी की नाथद्वारा और जयपुर की जनसभाओं में दिया कुमारी को तर्जी यह स्पष्ट करता है किउन्हें कोई नया तोहफा राजनीतिक तौर पर मिल सकता है।
कोई जमाना था ज कम राजा ने जयपुर के राजघराने को बेहद परेशान कर दिया था। राजमहल पैलेस होटल और उसकी जमीन को लेकर जो कुछ राजनीतिक खेल खेला गया। वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। लड़ाई राजनाथ सिंह तक गई थी और तत्कालीन सीएम राजे के इशारे पर जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों क्या कुछ किया यह सब को पता है। अब राजनीति में बदलाव की बयार आई है और हालात भी बदले हैं। पुराने हिसाब किताब चुकाने का अवसर भी आ चुका हैऔर राजनीतिक बदलाव से क्या कुछ होगा इसके लिए हम सब को इंतजार करना ही पड़ेगा।