


सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस और भाजपा के लिएअपने नेता के लिए भीड़ जुटाना एक चुनौती का काम बन रहा है। प्रदेश की दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने अपने अपने तरीके अपनाकर भीड़ जुटाने का रास्ता निकाल लिया है।
कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के नए भवन शिलान्यास कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के आने का कार्यक्रम बन रहा है। कांग्रेस ने यह कहकर अपना बचाव कर लिया है किइस अवसर पर जनसभा की जगह कांग्रेस अपने नवनियुक्त 52 हजार बूथ अध्यक्ष, 2200 मंडल अध्यक्ष, 400 ब्लॉक अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी, जिला प्रमुख, निगम बोर्ड के चेयरमैन विधायक और सांसद 60 हजार लोगों को बुलाने का फैसला किया है। यह कहा जा रहा है कि राहुल और खड़के चुनाव जीतने का मंत्र पदाधिकारियों को देख कर जाएंगे । यह भी कहा जा रहा है कि नवनियुक्त पदाधिकारियों को परिचय पत्र भी दिए जाएंगे इसके लिए प्रदेश कांग्रेस ने सूची मांगी है।
कांग्रेस तैयारी में लग गई है प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने पदाधिकारियों के साथ कार्यक्रम स्थल का दौरा कर लिया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित नेता भी आज या कल दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक कर सकते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कांग्रेस में अभी तक सीएम गहलोत और सीडब्ल्यूसी के सदस्य सचिन पायलट के बीच जो मधुर संबंध स्थापित होने चाहिए नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए निश्चित तौर पर मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को कदम उठाने पड़ेंगे। नहीं तो चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है। कहने को तो दोनों ही नेता कह रहे हैं कि पार्टी के लिए काम करेंगे और हमारे स्तर परकोई गुटबाजी नहीं है लेकिन सब जानते हैं क्या कुछ है इसे समाप्त करने की जरूरत है।
भाजपा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 सितंबर की जनसभा के लिए तैयारी में जुट गए हैं। भाजपा दावा कर रही है कि वह भी 52 हजार बूथ से प्रत्येक बूथ से10-10 कार्यकर्ताओं को बुलाएगी। पीएम मोदी की जनसभा ऐतिहासिक बनाने के लिए 5 लाख लोगों को लाने का दावा कर रही है।
लोकसभा का सत्र 23 सितंबर तक चलना है ऐसे में पार्टी इसके बाद तैयारियों में जुट जाएगी। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जयपुर आने की बात कही जा रही है। वे आकर व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक दिशा निर्देश देंगे और यह भी तय करेंगे कि कौन क्या जिम्मेदारी निभाएगा। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की भूमिका पर भी पीएम की जनसभा से निर्णय होना संभव लगता है। यही कारण है कि वाटिका में जनसभा का आयोजन किया है जहां पर रिंग रोड जयपुर को जोड़ता है ऐसा लगता है कि रिंग रोड के लिए कोई घोषणा की जा सकती है।
25 सितंबर को दीनदयाल जी की जयंती भी है उनके संबंध में कोई केंद्र सरकार योजना या स्मारक को नई सौगात भी दी जा सकती है। दोनों ही पार्टियों में अपने अपने नेताओं को खुश करने के लिए भीड़ जुटाने के लिए नए नए फार्मूले इजाद किए जा रहे हैं। अब चाहे कुछ भी कहो आचार संहिता लगने में भी बहुत ज्यादा दिन नहीं है। ऐसे में चुनावी तैयारियां और जोर पड़ेगी। भाजपा ने एक दर्जन मंत्रियों और सैकड़ों पदाधिकारियों के साथ विधायकों और सांसदों को राजस्थान में सक्रिय कर रखा है। उनकी सक्रियता किस प्रकार से चुनाव जिताने में सहयोगी बनेगी यह तो चुनाव परिणाम बता पाएगा।
कांग्रेस भी अब माहौल को अपने पक्ष में बनाने के लिए सीएम गहलोत ने 25 सितंबर से ईस्टर्न कैनाल परियोजना को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा देने के लिए पदयात्रा शुरू करने का ऐलान कर दिया है। यह पदयात्रा 5 दिन की होगी अब इसमें सीएम गहलोत के अलावा कौन-कौन लोग शामिल होंगे अभी घोषित नहीं किया है। सीएम गहलोत पीएम मोदी के मुकाबले के लिए यह कार्यक्रम बना लिया है उन्हें पता है कि मीडिया पर अपना स्थान बनाए रखने के लिए कार्यक्रम जरूरी है। स्थानीय मीडिया पर कब्जा जमाए रखने के लिए सीएम गहलोत ने जो कुछ किया है सबके सामने है।
अब सवाल यही उठता है दोनों पार्टी कार्यकर्ताओं की जगह इमेज मैनेजमेंट के भरोसे अपना काम चलाना चाहती है किसको कितनी सफलता मिलेगी यह तो चुनाव परिणाम ही बता पाएगा लेकिन कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है वह ठीक नहीं कहा जा सकता है।
विधानसभा के चुनाव में दोनों राजनीतिक पार्टियों को अपने पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने से ही पार्टी को फायदा हो सकता है। इवेंट मैनेजमेंट से दिखावा तो हो सकता है पर लेकिन पार्टी के संगठन में सक्रियता लाना दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है इसे दूर करने की जरूरत है नहीं तो बागी और तीसरे मोर्चे के लोग खेल बिगाड़ने में कामयाब हो सकते हैं। प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को इस पर सोच कर अपनी रणनीति तैयार करनी पड़ेगी है नहीं तो जो परिणाम आएंगे वह सभी को चौंका देंगे।