Saturday, 29 August 2026

चंबल रिवर फ्रंट के विवाद के चलते पहले सीएम का कार्यक्रम हुआ स्थगित ,अब मंत्रिमंडल की बैठक नहीं करने का फैसला


चंबल रिवर फ्रंट के विवाद के चलते पहले सीएम का कार्यक्रम हुआ स्थगित ,अब मंत्रिमंडल की बैठक नहीं करने का फैसला

कोटा चंबल रिवर फ्रंट के विवाद के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले उद्घाटन कार्यक्रम में जाने का कार्यक्रम मंगलवार देर रात 2:30 बजे स्थगित किया गया। इसके  12 सितंबर को मंत्रिमंडलीय विभाग के प्रमुख शासन सचिव दिनेश कुमार ने एक आदेश जारी कर कोटा में 13 फरवरी को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक को स्थगित कर दिया है। इस आदेश के बाद अब यह तय हो गया है कि सीएम गहलोत कोटा नहीं जाएंगे ।

कोटा चंबल रिवर फ्रंट के मामले को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक  प्रहलाद गुंजल ने सीएम गहलोत से अपील की थी कि वे इस गलत कार्य के लिए में नहीं आए। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रशासनिक तौर पर काम देखने वाले अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप राका ने पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कराई और उसमें सामने आया कि कोटा यूआईटी द्वारा कुछ अनुमति नहीं ली गई और प्रोजेक्ट निर्माण कर दिया गया। मुख्यमंत्री सचिवालय ने अपनी राय प्रकट करते हुए सीएम गहलोत से आग्रह किया कि वे अगर कोटा कार्यक्रम में जाते हैं तो निश्चित तौर पर यह चुनावी मुद्दा बनेगा और पार्टी को नुकसान भी होगा। ऐसे में  सीएम गहलोत का कार्यक्रम एन वक्त पर रद्द किया गया। जबकि सीएम गहलोत को मंगलवार को कोटा में1442 करोड़ के चंबल रिवर फ्रंट के लोकार्पण में जाना था यही नहीं उनके 25 कार्यक्रम भी घोषित किए गए थे ।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार  के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के ज्वाइन डायरेक्टर सुनील शर्मा ने राजस्थान के चीफ बाय वार्डन को लिखा था एक पत्र उसमें कहा गया था कि रिवरफ्रंट के प्रोजेक्ट में नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी से संबंधित एडवांसमेंट एक्ट के नियमों और गाइडलाइन के अनुपालन नहीं हो पा रही है। 

चंबल रिवर फ्रंट का निर्माण राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी क्षेत्र के ईको सेंसिटिव जोन में किया गया है। ये निर्माण पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 एवं वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों का उल्लंघन है। इस संबंध में राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड की स्थाई कमेटी की कोई अनुमति नहीं ली गई है।

नगर विकास न्यास की ओर से लीज पर वाणिज्यिक उपयोग के लिए होटल बनाने, दुकान बनाने के लिए जमीन लीज पर दी जा रही है। यह जमीन गैर मुमकिन नदी क्षेत्र की है जिसे न्यास को लीज पर देने का कोई अधिकार नहीं है।

सेंचुरी क्षेत्र के 10 किलोमीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का कोई निर्माण कार्य सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित सक्षम समिति की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता है।

राजस्थान सरकार की अधिसूचना 7 दिसंबर 1979 में चंबल नदी के दोनों किनारों पर 100-100 मीटर तक का क्षेत्र चंबल घड़ियाल सेंचुरी के अंतर्गत अधिसूचित किया था। अधिसूचना 3/9/1983 में चंबल घड़ियाल सेंचुरी क्षेत्र को नदी के दोनों किनारों पर 1-1 हजार मीटर तक का क्षेत्र चंबल घड़ियाल सेंचुरी अधिसूचित कर दिया था।

केंद्रीय वन पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के जारी दिशा निर्देश 9 फरवरी 2011 के अनुसार सेंचुरी के 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण बिना नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की स्टैंडिंग कमेटी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसी भी निर्माण से पूर्व पर्यावरण स्वीकृति लेना अनिवार्य है।

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