Saturday, 29 August 2026

कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सीएम गहलोत और पायलट के बीच समन्वय कराने में नहीं हुआ सफल, चुनाव में पार्टी को होगा नुकसान


कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सीएम गहलोत और पायलट के बीच समन्वय कराने में नहीं हुआ सफल, चुनाव में पार्टी को होगा नुकसान

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच आपसी समन्वय की कमी के चलते अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा बनाई गई केंद्रीय चुनाव समिति में किसी को स्थान नहीं मिल पाया है। कहने को तो सीडब्ल्यूसी में 7 नेताओं को स्थान मिल गया था। लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति में किसी को भी नहीं लेने से यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय नेतृत्व को यह पता है कि किसी नेता को लेने से यहां पर गुटबाजी भारी पड़ेगी, इसी के चलते किसी भी नेता को इसमें नहीं लेना यह स्पष्ट करता है कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। 

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री डीके सिंहदेव को केंद्रीय चुनाव समिति में लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने यह जता दिया है कि भविष्य में उन्हें छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेंद्र बघेल से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। राजस्थान में सीडब्ल्यूसी में भंवर जितेंद्र सिंह, सचिन पायलट, महेंद्रजीत मालवीय, मनु सिंघवी, पवन खेड़ा, हरीश चौधरी और प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को लिया गया था। अब केंद्रीय चुनाव समिति में इनमें से किसी को भी स्थान नहीं देकर यह तो बता दिया है कि केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान को यह  स्पष्ट संदेश दे चुका है कि जब तक आपसी समन्वय नहीं होगा तो केंद्र भी प्रदेश के नेताओं को ज्यादा तर्जी नहीं देगा। 

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय चुनाव समिति में अट्ठारह लोगों को लिया है। जिसमें पुराने नेताओं के साथ-साथ कुछ युवाओं को भी शामिल किया है। फिलहाल राजस्थान में संभावित उम्मीदवारों को लेकर केंद्रीय वरिष्ठ चुनाव पर्यवेक्षक मधुसूदन मिस्त्री और चुनाव समिति के अध्यक्ष गौरव गोगोई जयपुर में आकर प्रदेश के नेताओं से कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों के बारे में बातचीत कर चुके हैं। लेकिन अभी तक उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट से एक साथ मुलाकात नहीं की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में प्रदेश में कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों का चयन एक बहुत बड़ी चुनौती का काम होगा। 

सीएम गहलोत की कोशिश है कि उनके सभी लोगों को टिकट मिल जाए। वहीं दूसरी ओर सचिन पायलट का स्पष्ट तौर पर कहना है जिन्होंने पार्टी के साथ दगाबाजी की है उन्हें टिकट नहीं दिया जाए। ऐसे में स्थितियां चुनौतीपूर्ण है और यही स्थितियां कांग्रेस को अपनी सरकार रिपीट कराने में समस्या पैदा करेगी। आखिर केंद्रीय नेतृत्व इस बात को जानकर भी अनभिज्ञ क्यों है और जो प्रयास पहले किए गए थे वह अब सीएम गहलोत और सचिन के बीच की दूरियां को कम करने में सक्षम क्यों नहीं हो पा रहे हैं। सीएम गहलोत सरकारी साधनों के माध्यम से प्रदेश में दौरे कर यह जताने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने जो कुछ किया है उसी से ही सरकार रिपीट होगी। लेकिन वह इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं कि आम लोगों के बीच अभी तक कांग्रेस यह संदेश देने में कामयाब नहीं हो पा रही है कि पार्टी में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। 

केंद्रीय नेतृत्व के बार-बार निर्देशों के बावजूद भी सीएम गहलोत ने मंत्रिमंडल में कोई फेरबदल नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने अभी भी 3 दर्जन से ज्यादा निगम बोर्ड और आयोगों में नियुक्ति नहीं दी गई है। राजस्थान लोक सेवा आयोग में 5 सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सीएम गहलोत केंद्रीय नेतृत्व को यह जता चुके हैं कि उनकी मर्जी के बिना प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल और पदों की नियुक्ति में किसी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 6 सितंबर को भीलवाड़ा में किसान सम्मेलन को संबोधित करने आ रहे हैं। अबे क्या संदेश देंगे और आने वाले समय में किस प्रकार का परिवर्तन राजस्थान में देखने को मिलेगा इसके लिए सबको इंतजार करना पड़ेगा। राहुल गांधी ने  आदिवासी इलाके मानगढ़ आकर भी सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच समन्वय नहीं करा पाए। स्थितियां निश्चित तौर पर इन सब कारणों से कांग्रेस के लिए अनुकूल नहीं है। 

भाजपा ने अपने प्रचार को तेज कर दिया है 25 सितंबर को पीएम  नरेंद्र मोदी जयपुर में एक बड़ी जनसभा करने की योजना बना चुके हैं। मौजूदा स्थिति में सवाई माधोपुर, बेणेश्वर धाम और बाबा रामदेव धाम से तीन परिवर्तन यात्रा शुरू हो चुकी है और 5 सितंबर को नितिन गडकरी गोगा मेडी धाम से चौथी परिवर्तन यात्रा भी शुरू करेंगे। भाजपा के सभी नेता परिवर्तन यात्रा के माध्यम से एकता का संदेश दे रहे हैं। लेकिन वहां भी आपसी समन्वय की कमी के कारण चुनाव के संभावित प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं हो पा रही है। 

आप पार्टी के सुप्रीमो दिल्ली के मुख्यमंत्री  अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जयपुर आकर राजनीतिक माहौल देख चुके हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने भी चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर रखी है लेकिन वह कितने उम्मीदवार उतारेंगे यह स्पष्ट नहीं है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो ने 6 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। भाजपा का हरियाणा में सहयोग देने वाली  जेजेपी पार्टी ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे नारायण सिंह की पुत्रवधू को चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय कर चुके हैं। 

चुनावी घमासान तेज है लेकिन बिखराव के कारण अभी तक भाजपा और कांग्रेस अपने आपको मजबूत कह कर भी संभावित उम्मीदवार घोषित नहीं कर पा रही है। अब प्रदेश की राजनीति में और अधिक घमासान होने की स्थिति बनेगी । परिस्थितियों  के अनुरूप भाजपा और कांग्रेस ने निर्णय सही तरीके से नहीं किए तो निश्चित तौर पर विवाद अधिक बढ़ेगा और दोनों पार्टियों को नुकसान पहुंचाएगा। ऐसे में दोनों पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को अब अधिक सक्रिय होकर राजस्थान के बारे में फैसला करना ही पड़ेगा। हालात दोनों ही पार्टी में अच्छे नहीं है नेता एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए क्या कुछ करेंगे यह तो समय ही बताएगा लेकिन नेताओं की गुटबाजी निश्चित तौर पर दोनों पार्टियों को नुकसान पहुंचाएगी।


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