Saturday, 29 August 2026

जयपुर की 24 निजी स्कूलों ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत नहीं दिया 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश, माध्यमिक शिक्षा अधिकारी ने मान्यता रद्द करने के लिए निदेशालय को भेजा पत्र


जयपुर की 24 निजी स्कूलों ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत नहीं दिया 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश, माध्यमिक शिक्षा अधिकारी ने मान्यता रद्द करने के लिए निदेशालय को भेजा पत्र

सूचना के अधिकार के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं देने के मामले में  जयपुर के जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार हंस ने जयपुर के 24 निजी विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने का प्रस्ताव शिक्षा निदेशालय कानाराम को भेजा है। शिक्षा निदेशालय द्वारा कार्यवाही करने के बाद इन निजी विद्यालयों की मान्यता रद्द की जाएगी।

जयपुर के माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार हंस ने कहा कि सरकारी नियमों के तहत निजी विद्यालयों में नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी छोटी कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश दिए जाने के लिए लॉटरी निकाली गई थी। लेकिन इन निजी विद्यालयों ने  अंतिम तिथि 25 अगस्त तक किसी भी  गरीब बच्चे को  प्रवेश नहीं दिया। इसी के चलते  माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी ने इन विद्यालयों को नोटिस जारी किया और नोटिस के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई तो  उन्होंने मान्यता रद्द करने के लिए  माध्यमिक शिक्षा निदेशक कानाराम को पत्र भेजकर कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र हंस ने कहा कि 24 निजी विद्यालयों को नोटिस जारी किया है उसमें विद्या आश्रम स्कूल, रुक्मणी बिरला मॉडल स्कूल, वर्धमान श्री कल्याण इंटरनेशनल स्कूल, सेंट्रल अकैडमी स्कूल, वर्धमान इंटरनेशनल स्कूल, ब्राइटलैंड गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल,  सीडलिंग मॉडल स्कूल, टैगोर इंटरनेशनल स्कूल, महेश्वरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नीरजा मोदी स्कूल, कपिल ज्ञान पीठ स्कूल, महाराजा जवाई मानसिंह स्कूल, सेंट एडवांस कॉन्वेंट स्कूल, कैंब्रिज कोर्ट वर्ल्ड स्कूल, द पैलेस स्कूल और डिफेंस पब्लिक स्कूल शामिल है।  

उन्होंने कहा कि  नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिया। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत इन निजी विद्यालयों को सभी कक्षाओं में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश देने का प्रावधान किया हुआ है। इन विद्यालयों का कहना है कि छोटी कक्षाओं में सरकार कोई  फीस विद्यालयों को नहीं देती है। 

जबकि माध्यमिक शिक्षा के जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र  हंस का कहना है कि इन विद्यालयों को हमने नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी चलाने की अनुमति नहीं दे रखी है। इसके बावजूद यह विद्यालय इन छोटी कक्षाओं को चलाते हैं तो ऐसे में उन्हें शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश देना ही पड़ेगा। नहीं तो उनकी मान्यता रद्द  की जाएगी ।  इन नियमों का उल्लंघन करने के मामले में शिक्षा  निदेशक कानाराम को इनकी मान्यता रद्द करने के लिए पत्र भेजा गया है और आग्रह किया है कि इन की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाए।

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