


भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव के लिए सक्रिय की परिवर्तन यात्रा की योजना शुरू होने से पहले ही विवादित होते नजर आ रही थी। चारों दिशाओं की परिवर्तन यात्रा प्रदेश के किसी नेता के लिए शक्ति प्रदर्शन का हथियार नहीं बने। यही कारण है कि अब इसमें व्यापक परिवर्तन कर दिया गया है। हालही में जयपुर आए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने योजना में बदलाव का निर्णय किया है।
भाजपा के संगठन द्वारा निकाली जाने वाली चारों दिशाओं की परिवर्तित यात्रा की जिम्मेदारी किसी एक नेता को देने की वजह सामूहिक रखने का फैसला किया है। हालांकि यात्रा की व्यवस्था के लिए संयोजक जरूर घोषित किए गए हैं। पहली यात्रा त्रिनेत्र गणेश जी मंदिर सवाई माधोपुर से 2 सितंबर से शुरू होगी जिसको पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। जबकि दूसरी यात्रा 3 सितंबर को बेणेश्वर धाम से और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके अलावा रामदेवरा और हनुमानगढ़ गोगामेडी से 4 और 5 सितंबर को यात्रा शुरू होगी इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी हरी झंडी दिखाएंगे।
चारों परिवर्तन यात्रा का समापन 25 सितंबर को जयपुर में भाजपा के नेता स्वर्गीय दीनदयाल जी की जन्म स्थली धानकिया में करने की योजनाऔर समापन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाए जाने की रणनीति तैयार की जा रही है। चार दिशाओं से निकलने वाली पार्टी की परिवर्तन यात्रा में 50-50 विधानसभाओं का क्षेत्र निर्धारित किया है। इसके लिए कार्यक्रम और शेड्यूल तैयार किया जा रहा तैयार हो रहा है।
केंद्रीय संगठन पार्टी स्तर पर रथ तैयार करा रहा हैं। यात्रा की व्यवस्था के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी को सवाई माधोपुर, पूर्व मंत्री चुन्नीलाल गरासिया को बेणेश्वर धाम, पूर्व केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी को गोगामेडी और राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गहलोत को रामदेवरा की यात्रा का संयोजक बनाकर जिम्मेदारी देने का फैसला किया है । इन चारों परिवर्तन यात्राओं में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी, प्रतिपक्ष नेता राजेंद्र राठौड़ और उप नेता डॉ. सतीश पूनिया चारों यात्राओं में पार्टी के तय कार्यक्रम के अनुसार अपनी उपस्थिति देकर कार्यकर्ताओं और नेताओं को सक्रिय करेंगे। आखिर यह सब परिवर्तन क्यों हुआ इसके पीछे भी कई कारण हैं पार्टी की आंतरिक कलह विधानसभा चुनाव के दौरान सामने नहीं आए एन वक्त पर परिवर्तन यात्रा में यह सब किया जा रहा है।
फिलहाल परिवर्तन यात्रा के बाद क्या कुछ होगा इसके लिए हमें इंतजार जरूर करना पड़ेगा लेकिन भाजपा में भी सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है यह संकेत अभी भी मिल रहे हैं। यही चिंता है कि यहां पर चुनाव प्रचार कमेटी का गठन नहीं हो पाया है। यही नहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह कमजोर विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार पार्टी घोषित कर पाई है। जबकि केंद्र के सभी नेता दो तिहाई बहुमत का दावा कर रहे हैं। यह कितना सही और कितना गलत होगा यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा लेकिन अब भी यह कहना कि पार्टी के नेता सभी एक है और मजबूती के साथ काम कर रहे हैं उचित नहीं रहेगा।