


हाईकोर्ट ने मंगलवार को हेरिटेज नगर निगम जयपुर की निलंबित में मुनेश गुर्जर की याचिका पर सुनवाई की और सुनवाई अधूरी रही अब बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान निलंबित मुनेश गुर्जर के अधिवक्ता विज्ञान शाह ने कहा कि जिन आरोपों के आधार पर मेयर को निलंबित किए हैं वह झूठे हैं। निलंबन में कहा गया है कि मेयर को उनके पति सुनील गुर्जर ने उनकी उपस्थिति में ₹2 लाख लिए थे। लेकिन एसीबी की f.i.r. में ऐसा कोई जिक्र नहीं है। एफ आई आर में साफ तौर पर कहा है कि ₹2 लाख दलाल नारायण सिंह के पास से बरामद किए थे। मेयर के अधिवक्ता ने कहा कि ₹ 41 लाख 55 हजार घर मिले। वह मेरे ससुर के थे मेरे पति प्रॉपर्टी का काम करते हैं और उन्होंने अपने पिता वैशाली नगर वाला मकान भेजा था उसी के पैसे घर में रखे हुए थे।
वहीं दूसरी ओर सरकार के महाधिवक्ता एम एम सिंह भी ने कहा कि निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर के ससुर उनके साथ नहीं रहते हैं ऐसे में उनके ससुर का पैसा इनके मकान पर कैसे मिल सकता है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि मेयर मुनेश गुर्जर पट्टे की फाइल कई दिनों तक अपने घर पर रखती थी जिससे कि उसे पैसा प्राप्त हो सके।
एसीबी ने उनके घर से 6 फाइलें बरामद भी की है। जिस पट्टे की फाइल से ₹ 2 लाख की रिश्वत मांगी गई थी वह फाइल भी मेयर के घर से ही प्राप्त हुई है।
हाई कोर्ट में मंगलवार को बहस अधूरी रही और कोर्ट ने अब बुधवार को इसकी सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है।