


सुप्रीम कोर्ट में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के 300 करोड़ की जमीन के एकल पट्टा घोटाले की एसएलपी संख्या 5074//2023 में सोमवार कोसुनवाई होगी। अशोक पाठक की ओर से अधिवक्ता के सुल्तान सिंह यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के विरुद्ध पैरवी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर लता सुनवाई करेंगे।
जयपुर शहर के सांगानेर तहसील के ग्राम टोडी रमजानीपुरा में भीम सिंह ने चंद्रभान शर्मा, गोपाल शर्मा को कृषि भूमि बेची, जो भू राजस्व रिकॉर्ड में क्रय करने वालों के नाम दर्ज की गई।
चंद्रभान और गोपाल ने वर्ष 1991-92 में राजेंद्र नगर आदर्श गृह निर्माण सहकारी समिति को कृषि भूमि रजिस्टर्ड विक्रय पत्र से बेची। गृह निर्माण सहकारी समिति ने 6.78 हैक्टेयर (81,088 वर्ग गज) जमीन के आवासीय आवंटन पत्र 193 भूखंडधारियों को जारी किए।
समिति ने 3.43 हेक्टेयर (41,000 वर्ग गज) जमीन का नियमन 193 भूखंडधारियों के पक्ष में करने के लिए जेडीए को वर्ष 1995 में आवेदन किया,रेलवे के लिए राजस्थान सरकार के यातायात विभाग ने इस योजना के कुछ भाग की जमीन अवाप्त की, धारा 4 सी का नोटिस वर्ष 1997 तथा अवार्ड वर्ष 2001 में जारी हुआ। भू राजस्व रिकॉर्ड में यह कृषि भूमि चंद्रभान शर्मा के नाम दर्ज थी, इसलिए अवार्ड चंद्रभान के नाम जारी हुआ, जबकि समिति ने खरीद कर सदस्यों को भूखंड आवंटित कर दिए थे।
जेडीए ने वर्ष 2003 में 90 बी की कार्रवाई की अर्थात् कृषि भूमि से गैर-कृषि भूमि के रूप में लैंड यूज चेंज कर जमीन जेडीए के नाम तहसीलदार सांगानेर से दर्ज करवाई।
अति लाभदायक योजना को देखकर भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं से सांठगांठ होने के कारण उक्त समिति को शैलेंद्र गर्ग के पिता भूमाफिया भीमसेन गर्ग (अब स्वर्गीय) ने खरीदा।
समिति पर राजस्थान सहकारी संस्था अधिनियम 1965 के अंतर्गत अवसायक नियुक्त था, भू माफिया भीमसेन गर्ग ने समिति को अवसायन से मुक्त करने के लिए प्रार्थना पत्र लगाया कि योजना की जमीन की अवाप्ति हो गई है, इसलिए माननीय उच्च न्यायालय जयपुर में मुकदमा लड़ना चाहते हैं, मिलीभगत से उप रजिस्ट्रार सहकारी समिति जयपुर ने दिनांक 23अगस्त2001 को 1 वर्ष के लिए मुकदमा लड़ने की छूट प्रदान की। CMS 254/2002, CW 384/2002, WMAP 370/2003, SAW 1876/2011, , CMS 14140/2011 समिति ने हाई कोर्ट जयपुर में अवाप्ति को लेकर प्रस्तुत की थी।
मैसर्स गणपति कंस्ट्रक्शन को समिति का सदस्य बनाया गया, मैसर्स गणपति कंस्ट्रक्शन को वर्ष 1999 के बाद नियमानुसार गृह निर्माण सहकारी समिति का सदस्य नहीं बनाया जा सकता था,
अवाप्ति का भय दिखा कर भूखंडधारियों को डरा धमका कर औने-पौने दाम में आवंटन पत्रों को दलालों के माध्यम से मैसर्स गणपति के नाम से अवैध धन से खरीदा गया, अवाप्ति में गई जमीन के भूखंडधारियों से भी खरीदा गया, कई भूखंडधारियों से खरीदना दिखाने के फर्जी, कूट रचित कागजात बनाए गए, उन्होंने मैसर्स गणपति को बेचा ही नहीं, कई भूखंड धारी ने तो अभी तक नहीं बेचा है। 4 जून 2005 को समिति ने मैसर्स गणपति को 41092 वर्ग गज का आवंटन पत्र जारी किया।
1500 वर्ग मीटर से अधिक जमीन होने का कारण बताते हुए जेडीए ने 24086 वर्ग मीटर का एकल पट्टा मैसर्स गणपति को जारी करने के लिए यूडीएच को भेजा। समस्त कार्रवाई, प्रक्रिया को अवैध बताते हुए यूडीएच ने मैसर्स गणपति को जेडीए के द्वारा पट्टा देने के प्रस्ताव को परीक्षण करने के बाद स्वीकृति योग्य नहीं माना, इसके बाद यूडीएच और जेडीए से मूल पत्रावली मिलीभगत षड्यंत्र और भ्रष्टाचार से गायब कर दी गई।
दिसंबर 2008 में कांग्रेस सरकार बनी, जनवरी 2010 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से मिली भगत कर पट्टा दिलवाने का प्रार्थना पत्र दिया गया,
जेडीए ने प्रस्ताव यूडीएच को पुनः भेजा, यूडीएच मंत्री धारीवाल ने दिसंबर 2010 में उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के क्रम में पुनः परीक्षण करने के निर्देश दिए, प्रस्ताव को सही बताते हुए मंत्री को भेजा, मंत्री धारीवाल ने दिनांक 1.4.2011 को 24,086 वर्ग मीटर का पट्टा जारी करने की स्वीकृति दी। जेडीए ने 29 जून 2011 को 27,301.5 वर्ग मीटर का पट्टा मेसर्स गणपति कंस्ट्रक्शन जरिए प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम जारी कर दिया।
परिवादी राम शरण सिंह ने आरटीआई में सूचना मांगी, अपील संख्या 57/2012 में निर्णय दिया कि मूल पत्रावली तलाश कर उपलब्ध करवाई जाए, यूडीएच ने जेडीए को निर्देश दिए कि योजना पर कोई कार्रवाई न की जाए, लेकिन जेडीए ने मूल पत्रावली यूडीएच को नहीं भेजी।
रामशरण सिंह की शिकायत को देखते हुए अपराध पकड़े जाने के कारण दिखावा करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव यूडीएच जीएस संधू और यूडीएच मंत्री धारीवाल ने मामले में गंभीर अनियमितता, चीटिंग, मिलीभगत मानते हुए जेडीए के द्वारा जारी किए गए पट्टे को निरस्त करने, अपराध के लिए थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने, दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिनांक 10.5.2013 को जेडीए को दिए गए, लेकिन वर्ष 2018-2023 में भी कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया।
दिसंबर 2013 में भाजपा सरकार बनी, वर्ष 2014 में परिवादी रामशरण सिंह के परिवाद पर एसीबी ने एफआईआर दर्ज की, अधिकारियों की गिरफ्तारी की, सर्वोच्च न्यायालय से जमानत हुई।
शिकायतकर्ता रामशरण सिंह की शिकायत पर कार्यवाही होते देखकर मिलीभगत से शैलेंद्र गर्ग की माता मंजू गर्ग ने 31अगस्त 2012 को शिकायत की कि मैसर्स गणपति कंस्ट्रक्शन जरिए पार्टनर शैलेंद्र गर्ग के नाम से समिति ने पट्टा जारी किया था, लेकिन जेडीए ने मैसर्स गणपति कंस्ट्रक्शन जरिए प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम पट्टा जारी किया है, जो गलत है, मंजू गर्ग ने पारिवारिक विवाद, कोर्ट में वाद लंबित होना बताते हुए संपत्ति हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, जेडीए ने कार्रवाई नहीं की।
जेडीए ने 24 मई 2013 को पट्टा निरस्त कर दिया।ट्रायल कोर्ट ने 18 अप्रैल 2022 को मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच के निर्देश दिए, रामशरण सिंह ने प्रवर्तन निदेशालय को शिकायत की, प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।