Saturday, 29 August 2026

पानी के लिए तरस रही है जेडीए की एप्रूव्ड पृथ्वीराज नगर स्थित शिव विहार- सी कॉलोनी


पानी के लिए तरस रही है जेडीए की एप्रूव्ड पृथ्वीराज नगर स्थित शिव विहार- सी कॉलोनी

पृथ्वीराज नगर के अंतर्गत आने वाली शिव विहार सी कॉलोनी में लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं ,जबकि कई वर्षों पहले यहां बीसलपुर लाइन का अलॉटमेंट हो चुका है। 530  करोड़ का या प्रोजेक्ट अभी भी सिर्फ फाइलों के अंतर्गत सिमटा हुआ है ।

वर्ष 2015 में पृथ्वीराज नगर मान्यावास में आने वाली शिव विहार-सी जेडीए एप्रूव्ड हो गयी थी । सात साल बीतने के बाद भी लोगों को मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हुई है। कई बार शिकायत की गई  लेकिन फाइल जेडीए के एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर में चक्कर काट रही है और निर्दोष नागरिक दैनिक जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं।  यहां घर लेने वाले लोगों को जलापूर्ति के लिए नियमित रूप से पानी का टैंकर डलवाना पड़ता है, इससे उन्हें आर्थिक रूप से बोझ के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता से भी समझौता करना पड़ता है। टैंकर में आने वाला पानी पूर्णता फ्लोराइड युक्त है जिसके कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं। 

क्षेत्र के विधायकों ने भी समस्या के निराकरण के लिए कई कदम उठाये लेकिन राजनीति की भंवर में उनके प्रयास भी विफल हो गए। कालोनी निवासी सड़क ,पानी और सीवेरज की  अति आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित होकर जीवनयापन कर रहे है।  नियमन में करोड़ों खर्च करने के बाद भी नागरिकों को  रास्ता तक नहीं मिल पा  रहा है । 

शिव विहार सी कॉलोनी में करीब 154 मकान हैं। इन मकानों में रहने वाली जनता पानी के लिए पीड़ित है। पानी सबसे मूलभूत सुविधा में अग्रणी स्थान रखता है । पानी के बिना जीवन कष्ट में होता है और पानी की गुणवत्ता भी नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बहुत मायने रखती है।इन सभी दृष्टिकोण से शिव विहार कॉलोनी के लोग त्रासदी में जी रहे हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए अन्यथा नागरिकों का असंतोष निरंतर बढ़ता जा रहा है जो शांति व्यवस्था के लिए भी हानिकारक हो सकता है। 

यही नहीं पानी के लिए मचे हाहाकार में यहां जल माफिया भी सक्रिय हो गए हैं और खुलेआम भूमिगत जल की सौदेबाजी कर रहे हैं, प्रत्येक परिवार पानी के लिए ₹ 600 माह देता है, कालोनी में मकानों की संख्या देखते हुए आप माफिया के  दुस्साहस का अंदाज़ा लगा सकते हैं |  खास बात ये कि जिस पानी की सप्लाई की जाती है, वह पीने योग्य है भी या नहीं इसकी गुणवत्ता की जांच भी नहीं कराई जाती। इन माफियाओं में  से किसी के पास भी संबंधित विभाग से कोई लाइसेंस नहीं है।इसके बावजूद जल माफिया लोगों को लूटने में लगे हैं।

Previous
Next

Related Posts