


भाजपा से टोंक विधायक रह चुके अजीत सिंह मेहता की अगुवाई में दो दिन पूर्व निकाली गई तिरंगा यात्रा के बाद मंगलवार को सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया की अगुवाई में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र पराना समेत अन्य भाजपा से एमएलए के दावेदारों ने तिरंगा यात्रा निकाली।
गांधी खेल मैदान टोंक से शुरू हुई भाजपा की तिरंगा यात्रा में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र पराना,नगर परिषद टोंक की पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन, जिला महामंत्री विष्णु शर्मा,भाजपा युवा मोर्चा की पिछली कार्यकार्यकारिणी के महामंत्री चन्द्रवीर सिंह चौहान तथा निवाई-पीपलू से भाजपा टिकट की दौड़ में शामिल प्रभु बाडोलिया अपने समर्थकों के साथ भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया की अगुवाई में वाहन रैली के रूप में तिरंगा यात्रा की शुरुआत की ।यह तिरंगा यात्रा मुख्य बाजारों से होती हुई रामलीला मैदान पहुंच करके सम्पन्न हुई।
रैली में मोटर साईकिलों पर भाजपा कार्यकर्ता सहित पांचों टिकट के दावेदारों के समर्थक हाथो में तिरंगा लिए हुए नारेबाजी करते हुए चल रहे थे।जिस तिरंगा यात्रा का पुष्प वर्षा करके लोगों ने स्वागत तो किया,लेकिन भाजपा का सच्चा कार्यकर्ता तिरंगा यात्रा के पीछे छिपे राज को अच्छी तरह समझ रहा था कि आखिर इस तिरंगा यात्रा के पीछे पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता की अगुवाई में निकाली गई तिरंगा यात्रा से अधिक भीड़ जुटा करके खुद को मजबूत दिखाना था।
भाजपा कार्यकर्ताओं को सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह हुआ कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने पार्टी को मजबूत किए जाने एवं पार्टी की गुटबाजी को खत्म किए जाने का जिम्मा सांसद सीपी जोशी को देकर राजस्थान भेजा था उन्ही की टीम के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं टोंक-सवाईमाधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया इस शक्ति प्रदर्शन के लिए निकाली गई तिरंगा यात्रा की अगुवाई कर रहे थे। जो पार्टी की गुटबाजी को दर्शा रही थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर तिरंगा अभियान के जरिए आजादी के अमृतकाल महोत्सव में तिरंगे को जन जन तक पहुंचाने की बड़ी सोच से तिरंगा यात्रा निकालने की योजना बनाई थी।लेकिन न तो पीएम मोदी न ही पार्टी के योजनाकारों को यह पता था कि यह तिरंगा यात्रा पार्टी की गुटबाजी व विधानसभा चुनाव से पूर्व टिकट दावेदारों के लिए शक्ति प्रदर्शन के रूप में इस्तेमाल की जाएगी।
भाजपा के अलग-अलग दो गुटों की तरफ से तीन दिन में निकाली गई दो तिरंगा यात्रा की सफलता व असफलता को लेकर चाहे आयोजक खुश हो लेकिन पार्टी तथा आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी हित के लिए शुभ संकेत नही है। वैसे तो मंगलवार को निकाली गई तिरंगा यात्रा को राष्ट्रीय कार्यक्रम बताते हुए शक्ति प्रदर्शन को नकार रहे है लेकिन यह न तो कार्यकर्ताओ न ही आमजन के गले उतर रहा।
टोंक से भाजपा का प्रत्याशी कौन होगा यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन भाजपा कार्यकर्ता अभी से ही गुटबाजी में बंटते दिख रहे है यह खाई आगे जाकर पार्टी के लिए नुकसानदायक होगी।