Saturday, 29 August 2026

एकल पंच द्वारा जारी अवार्ड को वाणिज्यिक न्यायालय ने किया आर्बिट्रल अवार्ड निरस्त


एकल पंच द्वारा जारी अवार्ड को वाणिज्यिक न्यायालय  ने  किया आर्बिट्रल अवार्ड निरस्त

वाणिज्यिक न्यायालय, जयपुर ने ट्रक फाईनेंस व लोन से जुड़े मामले में गारंटर कैलाश शर्मा के खिलाफ एकल पंच द्वारा पारित आर्बिट्रल अवार्ड को निरस्त करने का आदेश दिया।

ट्रक खरीदने के लिए बनवारीलाल ने श्री राम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लि. से 5 लाख 30 हजार का लोन लिया था जिसमें कैलाश शर्मा ने बतौर गारन्टर हस्ताक्षर किये थे। लोन लेने के कुछ समय बाद ही बनवारीलाल और ट्रक दोनों लापता हो गए। काफी समय बाद गारन्टर कैलाश शर्मा द्वारा कंपनी को सूचना दी गई की लापता हुआ ट्रक कोहिमा, नागालैण्ड में पुलिस द्वारा लावारिस मान धारा 102 सीआरपीसी के तहत जब्त किया हुआ है, उसके उपरांत भी कंपनी के द्वारा ट्रक जब्ती और रिकवरी के संबंध में कार्यवाही न कर उल्टा गारन्टर के खिलाफ ही आर्बिट्रेटर नियुक्त करते हुए आर्बिट्रेशन की कार्यवाही शुरू कर दी। आर्बिट्रेटर ने गारन्टर कैलाश शर्मा के खिलाफ अवार्ड पारित करते हुए 7 लाख 36 हजार रूपए मय 36 प्रतिशत सालाना ब्याज कंपनी को लोन चुकाने के रूप में देने का आदेश दिया। 

आर्बिट्रल अवार्ड से द्रवित होकर गारंटर कैलाश शर्मा ने वाणिज्यिक न्यायालय, जयपुर में अपील दायर की । अपीलार्थी की तरफ से अधिवक्तागण मनीष शर्मा व कुणाल शर्मा ने पक्ष रखते हुए न्यायालय  को बताया कि गारन्टर ने ट्रक के बारे में सूचना देने के बावजूद भी कंपनी की तरफ से ट्रक को रिकवर करने की बजाए मन से स्वयं का आर्बिट्रेटर नियुक्त कर गारंटर के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी। 

वाणिज्यिक न्यायालय को अधिवक्ताओं द्वारा यह भी बताया गया कि आर्बिट्रेटर द्वारा आर्डर शीट में लिखना कि आज तारीख पेशी में श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाईनेंस कंपनी से दूसरे प्रकरणों में फीस ली गई साफ तौर पर इंगित करता है कि कंपनी के कई और मामलों में आर्बिट्रेटर को बतौर मध्यस्थ कंपनी द्वारा नियुक्त किया गया है। ऐसे में आर्बिट्रेटर द्वारा कंपनी को यह सहूलियत देना कि कंपनी जब चाहे तब दस्तावेज पेश कर सकती है और दूसरे प्रकरणों में फीस ली गई यह दर्शाता है कि कंपनी द्वारा नियुक्त आर्बिट्रेटर न तो निष्पक्ष है न ही उनके द्वारा पारित आर्बिट्रल अवार्ड प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के घोर विपरीत औरअपास्त  किए जाने योग्य है।

अधिवक्तागण मनीष शर्मा कुणाल शर्मा की ओर से उक्त आपत्ती व सुनकर वाणिज्यिक न्यायालय ने आर्बिट्रल अवार्ड न्याय के दलीलें सिद्धान्तों के विपरीत पाकर अपास्त करने के आदेश पारित कर दिए।


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