


राजस्थान के इतिहास में 7 अगस्त सोमवार का दिन ऐतिहासिक माना जाएगा । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में यह प्रदेश 7 संभाग की जगह 10 संभाग जिसमें सीकर, पाली और बांसवाड़ा 3 नए संभाग और 33 जिलों की जगह 50 जिले वाला बन जाएगा। 17 नए जिले प्रदेश के आम लोगों को मिले हैं। उनमें कार्य करने वाले अधिकारी संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टर के साथ ही जिला पुलिस अधीक्षक की हैसियत में आ जाएंगे। सभी नए जिला मुख्यालय पर सोमवार को समारोह आयोजित किए जा रहे हैं जिसमें विभिन्न मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वह नए जिलों की स्थापना के समारोह में मौजूद रहकर लोगों को सीएम गहलोत के निर्णय से अवगत कराएं।
सीएम गहलोत का विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले यह मास्टर स्टॉक कांग्रेस पार्टी को क्या कुछ दिलाएगा यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा। लेकिन यह निर्णय निश्चित तौर पर विपक्षी पार्टियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। यही कारण है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस बात से चिंतित है कि इस ऐतिहासिक निर्णय का उनके पास तोड़ क्या रहेगा ? यही कारण है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने राजस्थान में विधानसभा के चुनाव की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंधों पर डालने का फैसला किया है। भाजपा के इस निर्णय से सीएम गहलोत में कुछ घबराहट जरूर है। यही कारण है कि सीएम गहलोत ने यह कहकर अपनी प्रतिक्रिया दी की राजस्थान के गई भाजपा के नेता 3 बार और 4 बार चुनाव जीत चुके हैं लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उनका चेहरा घोषित नहीं कर पा रहा है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व भी सीएम गहलोत के चेहरे पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है, मगर सरकार के कामकाज के आधार पर विधानसभा के चुनाव के लड़ने के पक्ष में है।आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए राहुल गांधी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तीनों में अपनी नई घोषणाओं के आधार पर चुनाव लड़ने का ऐलान करने की कार्य योजना बना रहे हैं। उसी आधार पर कांग्रेस विधानसभा का चुनाव लड़कर जीतने का प्रयास करेगी। 9 अगस्त को राहुल गांधी मानगढ़ आदिवासी इलाके में आ रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर ही सीएम गहलोत ने प्रदेश में तीन नए संभाग और 17 नए जिले स्थापित करने का ऐतिहासिक फैसला लेकर उसे क्रियान्वित भी कर दिया है। बड़े फैसले प्रदेश की राजनीति में निश्चित तौर पर दूरगामी परिणाम लाने का संदेश देने का काम करते हैं। लेकिन इन फैसलों की ताकत को सत्ताधारी पार्टी कितना अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में सफल होती है वह तो आगामी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव परिणाम ही बता पाएंगे।
चर्चा जरूर है कि मैंने उसे कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनने की स्थिति बनी है।यह निश्चित तौर पर कहा जाता है कि सीएम गहलोत ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले घोषणाएं और उनका क्रियान्वयन जरूर किया है। लेकिन मौजूदा स्थिति में जो घटनाएं घट रही है उससे कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा है। इसे मिटाना एक बड़ी चुनौती का काम है उन्हीं के पार्टी के नेताओं ने इस पर जो टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं की है उससे सीएम गहलोत की छवि पर प्रश्नचिन्ह लगा है।
अब चाहे कुछ भी कहो लेकिन 7 अगस्त सोमवार का दिन देश में राजस्थान को एक नई पहचान देने वाला बनेगा। कई जिले ऐसे हैं जो कि विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को भी खुशी देने वाले हैं अब उन प्रतिनिधियों के पास सीएम गहलोत की प्रशंसा करने के अलावा कुछ भी नहीं है। सीएम गहलोत की यही ताकत उन्हें राजनीतिक तौर पर मजबूत बनाने का काम करती है। आओ हम सब भी अपने नए राजस्थान बनने के जश्न में शामिल होकर बधाइयां और शुभकामनाएं दे जिससे कि प्रगति के रास्ते और खुल सके।