Saturday, 29 August 2026

सीएम गहलोत को राहुल गांधी की यात्रा से पहले ईआरसीपी आई याद, किसानों से मुलाकात और धन्यवाद का क्या निकलता है मतलब !


सीएम गहलोत को राहुल गांधी की यात्रा से पहले ईआरसीपी  आई  याद, किसानों से मुलाकात और धन्यवाद  का क्या निकलता है मतलब !

आखिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  को राहुल गांधी की 9 अगस्त की यात्रा से पहले पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी)की याद क्यों आई !  

यही नहीं रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर किसान मोर्चा राजस्थान के अध्यक्ष हिम्मत सिंह गुर्जर के नेतृत्व में किसानों का प्रतिनिधिमंडल  की मुलाकात कराकर इस मुद्दे को फिर से प्रदेश की राजनीति में ताजा कर दिया। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने ईआरसीपी के मुद्दे को उछालने का प्रयास जरूर किया था। बिना सचिन पायलट के पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस का वर्चस्व कैसे कायम हो इसकी रणनीति पर  कामहो रहा है । सीएम गहलोत के रणनीतिकार अब कोशिश में जुट गए हैं कि किसी तरह से राहुल गांधी का सीएम गहलोत को सहारा मिल जाए। उन्होंने जी तोड़ कोशिश भी शुरू की है। इसी रणनीति के तहत पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के तहत आने वाले सभी 13 जिलों  के किसानों  की मुलाकात भी इस रणनीति का हिस्सा है।  रणनीति के तहत ही  किसानों से यह करवाया गया कि सीएम गहलोत ने बजट में ईआरसीपी के लिए 13 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान  किया है वह निश्चित तौर पर कॉन्ग्रेस पार्टी की स्थिति को मजबूती देने का काम करेगा। किसानों ने इसके लिए  सीएम गहलोत को धन्यवाद  भी दिया। 

पूरे राजस्थान के 13 जिलों से हाय किसानों से यह भी   चहल कहलवाया गया कि सीएम गहलोत इस महत्वपूर्ण परियोजना को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। अब यहां यह भी कहा जा सकता है कि 9 अगस्त को मानगढ़ की यात्रा के दौरान सीएम गहलोत अपने संबोधन में ईस्टर्न कैनाल और मानगढ़ को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाने  एलान राहुल गांधी से यह कहते हुए करा सकते हैं कि देश में कांग्रेस गठबंधन इंडिया की सरकार बनेगी तो यह सपना पूरा किया जाएगा । 

सीएम गहलोत स्थितियां अब कुछ भी हो लेकिन अपने आगामी रणनीति को तैयार करने में सक्रिय हैं। विधानसभा चुनाव में उनकी हैसियत कैसे बड़े इसकी चिंता भी उन्हें सता रही है। मौजूदा स्थिति में  कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव स्क्रीनिंग कमेटी में जो फैसला किया है उससे सीएम गहलोत की भविष्य की राजनीति पर कुछ सवाल भी पैदा हो गए हैं ! फिलहाल सीएम रहते यह फैसले अभी प्रभावी नहीं बन पा रहे हैं लेकिन आने  वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 

नेतृत्व का सवाल निश्चित तौर पर सीएम गहलोत की राजनीतिक हैसियत को कम करता दिख रहा है। राजनीतिक गलियों में चर्चा है कि सीएम गहलोत इन दोनों पार्टी के फैसलों से नाराज हैं। लेकिन वे इसको हम चर्चा नहीं बनाना चाहते हैं यही कारण है कि इन दोनों में ताबड़तोड़ फैसले कर अपनी हैसियत को दिखाने का जरूर प्रयास कर रहे हैं। 

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