Saturday, 29 August 2026

विधानसभा में विधेयक पारित होने से किसान कर्ज राहत आयोग बनाने का रास्ता हुआ साफ, पीड़ित किसान नहीं होगी जमीन नीलाम


विधानसभा में विधेयक पारित होने से किसान कर्ज राहत आयोग बनाने का रास्ता हुआ साफ, पीड़ित किसान नहीं होगी जमीन नीलाम

किसान कर्ज राहत आयोग विधेयक  विधानसभा में पारित होने के साथ ही किसान राहत आयोग बनाने का रास्ता साफ हो गया है। आयोग के गठित होने के बाद बैंक और कोई भी वित्तीय संस्था किसी भी कारण से फसल खराब होने की स्थिति में कर्ज वसूली का दबाव नहीं बना सकेंगी।  किसान फसल खराब होने के हालात में कर्ज माफ की मांग करते हुए इस आयोग के पास आवेदन कर सकेंगे। आयोग पीड़ित किसान को राहत देने में सक्षम होगा।

राजस्थान राज्य किसान कर्ज राहत आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को बनाए जाने का प्रावधान किया गया है। आयोग के 4 सदस्य होंगे जिसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव के सेवानिवृत्त स्तर का अधिकारी, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायधीश और बैंकिंग सेवा तथा कृषि विशेषज्ञ के जानकार लोगों को सदस्य बनाया जाएगा।सहकारी समितियों रजिस्टर स्तर के अधिकारी को सदस्य सचिव बनाए जाने का प्रावधान है।
किसान  कर्ज राहत आयोग को कोर्ट जैसे अधिकार दिए जाएंगे।

कर्ज नहीं चुका पाने को लेकर अगर किसान आवेदन करता है या आयोग खुद अपने स्तर पर समझता है कि हालत वाकई खराब है तो वह उसे संकटग्रस्त किसान घोषित कर सकता है। संकटग्रस्त किसान का मतलब है कि उसकी फसल खराबे की वजह से वह कर्ज चुका पाने में सक्षम नहीं है। संकटग्रस्त किसान घोषित होने के बाद बैंक उस किसान से जबरदस्ती कर्ज की वसूली नहीं कर सकेगा।

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