Saturday, 29 August 2026

प्रदेश में 1.20 लाख संविदा नौकरी का वादा, मिली महज तीन हजार, तुष्टिकरण को प्राथमिकताः राज्यवर्धन सिंह


प्रदेश में 1.20 लाख संविदा नौकरी का वादा, मिली महज तीन हजार, तुष्टिकरण को प्राथमिकताः राज्यवर्धन सिंह

राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौड ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के सामने रीट पेपर लीक सहित बेेरोजगारी भत्ते के नाम पर वादाखिलाफी जैसी चुनौतियां पहले से ही थी। गहलोत सरकार ने गुजरात चुनाव में चुनाव प्रभारी रहते हुए वादा किया था कि हम प्रदेश में 1.20 लाख युवाओं को संविदा पर नौकरी देंगे। लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने महज तीन से चार हजार युवाओं को संविदा पर नौकरी दी है। इसमें भी शर्त लगाई गई तीन साल को एक साल माना जाएगा और कम से कम 15 साल के अनुभव वाले लोगों को संविदा पर भर्ती किया जाएगा। 

रविवार को भाजपा मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कर्नल राठौड ने गहलोत सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि संविदाकर्मियों की भर्ती में भी तुष्टिकरण करने से गहलोत सरकार बाज नहीं आई। सबसे पहले मदरसों में काम करने वाले लोगों को संविदा नौकरी में प्राथमिकता दी गई। क्या यह सरकार किसी एक खास समुदाय या वर्ग के लिए शासन कर रही है। क्या कोई सरकार किसी एक वर्ग के लिए शासन करती है, क्या उनकी पूरे राजस्थान को समानता की नजरों से देखने की जिम्मेदारी नहीं बनती। वहीं पशुपालन विभाग में सरकार ने खुद को अलग करके थर्ड पार्टी कॉंट्रेक्ट पर संविदाकर्मियों को भर्ती करने का काम किया है। 

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जब नौकरी के लिए सम्मेलन या शिविर लगाती है तो एक साथ 60-70 हजार लोगों को नौकरी देती है, और वह नौकरी संविदा पर नहीं होती यह सरकारी नियुक्ति होती है। इस तरह से केंद्र सरकार दस लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देगी। 

उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार अब सभी विभागों में थर्ड पार्टी कॉंट्रेक्ट पर नौकरी देने का काम शुरू करेगी। प्रदेश के स्कूलों में ना कमरे हैं, ना ही अध्यापक हैं। वहीं पेपर लीक को सरकार को वसूली का धंधा बना रखा है। लाखों युवा सालभर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, कर्ज लेकर अपना घर छोडकर कोचिंग में पढते हैं। अंत में पता चलता है कि पेपर या तो लीक हो जाता है या फिर रद्द हो जाता है। 

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