


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार अब ‘राजस्थान विधानसभा में 6 और विधेयक लाएगी। इनमें से राजस्थान समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण संशोधन विधेयक- 2023, राजस्थान प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार विधेयक, गांधी वाटिका न्यास विधेयक और राजस्थान टेनेंसी संशोधन विधेयक 2023 शामिल हैं।
विधानसभा में सोमवार को कोटा व उदयपुर विकास प्राधिकरण, गांधी वाटिका, गिग वर्कर जैसे बिलों को पेश किया जाएगा। यानी अब कोटा व उदयपुर में न्यास नहीं, विकास प्राधिकरण हो जाएंगे।
विधानसभा में पेश किए जाने वाले राजस्थान समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण संशोधन विधेयक- 2023 के तहत अब कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस आयुक्त को जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। विधेयक के उद्देश्य में कहा गया है कि पिछले 2006 और 2008 के एक्ट समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ शांति-व्यवस्था बनाए रखने में अत्यंत उपयोगी रहे हैं।
मौजूदा समय में जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां तो महानगरों में पुलिस कमिश्नर को मिली हुई हैं, लेकिन वे दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में पुलिस आयुक्त की परिभाषा में भी संशोधन किया जाएगा।
राजस्थान प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार विधेयक-2023 सोमवार को प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें ओला-उबर जैसे एप से जुड़कर सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के कल्याण की बात कही गई है। इस एक्ट के तहत गिग वर्कर्स के लिए उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बोर्ड का गठन किया जाएगा। इसके अलावा उनके कल्याण के लिए एक कल्याण कोष भी स्थापित किया जाएगा।
राजस्थान टेनैंसी (संशोधन) बिल-2023 पेश किया जाएगा। राजस्थान टेनैंसी एक्ट 1955 की धारा 48 में संशोधन किया जा रहा है। इस एक्ट में धारा 48 में नई उपधारा -3 जोड़ी जा रही है। इसमें प्रावधान किया जा रहा है कि नवीकरणीय ऊर्जा (विंड व सोलर) के पावर प्लांट के मध्य में आने वाली सरकारी जमीन को लेने के लिए अब संबंधित कंपनी या व्यक्ति प्रस्ताव दे सकता है।
गहलोत सरकार इस प्रस्ताव पर परीक्षण करवाएगी और भूमि की बाजार कीमत या सक्षम अधिकारी द्वारा तय कीमत पर वह सरकारी जमीन संबंधित व्यक्ति या कंपनी को दी जा सकेगी।
गांवों में किसानों को खेत के लिए दूसरे लोगों के खेतों से होकर जाना पड़ता है। पाइपलाइन भी नहीं डाल सकते। राजस्थान टेनैंसी एक्ट 1955 की धारा 251 क की उपधारा में प्रावधान किया जा रहा है कि अब किसान दूसरे किसान के खेत से पाइपलाइन डालकर ले जा सकेगा। साथ ही अपने खेत में जाने के लिए 30 फीट का रास्ता ले सकेगा। रास्ता चौड़ा करवा सकता है। इसके लिए किसान को एसडीएम के पास आवेदन करना होगा। एसडीएम जांच के बाद इस पर कार्यवाही करेगा। इसके लिए प्रभावित किसान को भूमि के बदले भूमि के साथ ही मुआवजा का प्रावधान किया जा रहा है।