Saturday, 29 August 2026

प्रतिपक्ष ने विधानसभा में फूड पैकेज बांटने के मामले को लेकर सीएम गहलोत और दो मंत्रियों में विवाद को लेकर किया हंगामा और वाकआउट


प्रतिपक्ष ने विधानसभा में फूड पैकेज बांटने के मामले को लेकर सीएम गहलोत और दो मंत्रियों में विवाद को लेकर किया  हंगामा और  वाकआउट

विधानसभा में शुक्रवार को स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से प्रतिपक्ष ने अन्नपूर्णा योजना के माध्यम से प्रदेश के लोगों को दिए जाने वाले फूड पैकेट को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित दो मंत्रियों के बीच अधिकारों और कमीशन को लेकर चल रहे   विवाद का मामला प्रतिपक्ष ने उठाया। 

प्रतिपक्ष ने इस मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया और इस योजना को रोकने की मांग की। अपना विरोध प्रकट करने के लिए सदन से वाकआउट करके चले गए।

प्रतिपक्ष के नेता विधायक डॉ. सतीश पूनिया और भाजपा विधायक अनिता बघेल, सुभाष पूनिया, प्रताप सिंह सिंघवी ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए फ्री राशन किट योजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। 

उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया ने यहां तक कह दिया कि यह सरकार अली बाबा और चालीस चोर की सरकार है। उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया नेअन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना में आरटीपीपी एक्ट की धज्जियां उड़ाई गई हैं। एक कंपनी विशेष को फायदा देने के लिए सरकार के गरीबों के कमाई के पैसे पर डाका डालने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के 78 प्रतिशत  लोगों को रिश्वत देनी पड़ती है। इस सरकार मे हर तरह के माफिया हैं। इस सरकार में हर तरफ माफिया हावी हैं- भूमाफिया, शराब माफिया, तबादला माफिया, खनन माफिया, शिक्षा माफिया, जेल माफिया, राजनीति माफिया, ये माफिया, वो माफिया। ऐसी सरकार का सत्यानाश हो जाए तो भी कम है।

भाजपा विधायक अनिता बधेल ने स्थगन के जरिए मामला उठाते हुए कहा- अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना को लेकर पहले मुख्यमंत्री और खाद्य मंत्री के बीच विवाद हुआ। खाद्य विभाग से इसे सहकारिता विभाग को दे दिया। जब बजट पास हो गया तो बिना विधानसभा की मंजूरी के इसे बदला नहीं जा सकता। इसके बावजूद सरकार ने करप्शन करने के लिए पहले इसे सहकारिता को दिया फिर कलेक्टरों के जरिए टेंडर करने का प्रावधान कर दिया। फिर मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि फूड पैकेट के बदले 300 रुपए खाते में डाल देंगे। आप इस तरह की योजनाओं में करप्शन क्यों करना चाहते हैं? क्यों जनता की गाढ़ी कमाई को लुटाना चाहते हैं?

उन्होंने  फूड पैकेट योजना में करप्शन और मनमानी शर्तों के खिलाफ हाईकोर्ट तक में मामला गया है। सरकार ने कलेक्टरों के जरिए टेंडर करवाने में भी शर्त रख दी कि केवल 50 करोड़ से ज्यादा के सप्लाई के अनुभव वाली फर्म को ही काम दिया जाएगा। 50 करोड़ की सप्लाई की बाध्यता वाली शर्त रखकर सरकार किस निजी व्यक्ति या कंपनी को लाभ देना चाहती है? मुख्यमंत्री ने फ्री फूड पैकेट बांटने की घोषणा की थी, आम आदमी फूड पैकेट का इंतजार कर रहा है। सरकार को केवल कमिशन की चिंता है। अभी तक लोगों तक फूूड पैकेट नहीं पहुंचाए हैं।

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