Saturday, 29 August 2026

राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण विधेयक 2023, विधानसभा में हुआ पारित, बिना अनुमति के मेला लगाने वाले पर 2 साल की जेल और आर्थिक जुर्माना का प्रावधान


राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण विधेयक 2023, विधानसभा में हुआ पारित, बिना अनुमति के मेला लगाने वाले पर 2 साल की जेल और आर्थिक जुर्माना का प्रावधान

जोधपुर के मेहरानगढ़ और सीकर के खाटूश्यामजी में हुई घटना के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को विधानसभा में मेला प्राधिकरण बनाने के विधेयक को मंजूरी प्रदान की। विधानसभा में पारित किए गए राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण विधेयक 2023 के लागू होने के साथ ही अब बिना मंजूरी  के मेला लगाने पर 1 साल की सजा  और जुर्माना दोनों के प्रावधान किए गए हैं। 

मेला प्राधिकरण की शर्तों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की सजा और जुर्माना लगेगा। देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत द्वारा विधानसभा में पेश विधायक में कुछ कड़े प्रावधान किए हैं। जिलों में लगने वाले मेलों की निगरानी के लिए प्रदेश और जिला स्तरीय एजेंसी बनाई जाएगी। राज्य स्तर पर राज्य मेला प्राधिकरण और जिले स्तर पर अलग  जिला मेला समिति बनाई जाएगी।

मेलों में फैली भगदड़ से मौत हो जाने पर 2 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। यह सजा आयोजकों को देने का प्रावधान किया है। कोई भी मेला बिना कलक्टर या एसडीएम की मंजूरी के नहीं लग सकेगा। कम से कम एसडीएम की मंजूरी लेना आवश्यक होगा मेले के आयोजन के लिए आयोजक संस्था को 1 महीने पहले मंजूरी आवेदन एसडीएम के पास करना होगा। मेले की मंजूरी के आवेदन पर 7 दिन में फैसला करना होगा। मेले के आयोजकों को कुछ शर्तों के आधार पर मंजूरी प्रदान की जाएगी। मेले में आने वाले लोगों के लिए पार्किंग सुविधा सुरक्षा व्यवस्था, फायर फाइटिंग और लाइफ सेविंग के साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सारी व्यवस्थाएं  नियमानुसार कायम करनी पड़ेगी।

राज्य मेला प्राधिकरण विधेयक केअनुसार राज्य स्तरीय प्राधिकरण में पर्यटन मंत्री अध्यक्ष होंगे जबकि मेलों में रुचि रखने वाली मशहूर हस्ती को इसका उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। सभी बड़े विभागों के प्रमुख सचिव, डीजीपी, एडीजी इसके सदस्य होंगे। चिकित्सा, सार्वजनिक निर्माण विभाग, ऊर्जा, वर्ष, यूडीएच, अल्पसंख्यक विभाग पंचायती राज विभाग, सहकारिता आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा, लघु उद्योग निगम और सूचना जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिवों को सदस्य बनाया गया है।
राज्य प्राधिकरण की 6 महीने में कम से कम एक बैठक होना आवश्यक होगी इसके अलावा अध्यक्ष की मंजूरी से कभी बैठक बुलाई जा सकती है। राज्य मेला प्राधिकरण में मेले के आयोजन से लेकर उनके प्रबंधन और रेवेन्यू को लेकर पॉलिसी तय करेगा इसके साथ ही इसकी  एसओपी भी तय की जाएगी।

मेला प्राधिकरण विधेयक के अनुसारजिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला मेला समिति बनाई जाएगी।इस समिति का उपाध्यक्ष एसपी को बनाया गया है। जिले के सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे। मेलों के आयोजन की मंजूरी से लेकर उसकी निगरानी की जिम्मेदारी इस समिति के पास रहेगी। अगर मेले के आयोजन के लिए फंड की जरूरत पड़ेगी तो उसकी व्यवस्था भी राज्य सरकार से यह समिति ही कराएगी।

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