


अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी द्वारा सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे विवाद को सुलझाकर विधानसभा चुनाव एक होकर होकर लड़ने का ऐलान तो कर दिया है। उसका क्रियान्वयन धरातल पर आने में समय लग रहा है। उसका मूल कारण यही है कि प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, सचिन पायलट, हरीश चौधरी और सांसद नीरज डांगी संगठन में होने वाले व्यापक बदलाव को लेकर विचार-विमर्श तो कर चुके हैं लेकिन सूची जारी नहीं हो पा रही है। सीएम गहलोत कहने को तो इन सब बातों से दूर है लेकिन वह अभी तक पूर्ण तरह स्वस्थ नहीं हो पाए हैं और न ही किसी से मुलाकात कर रहे हैं। यही कारण है कि तैयार सूची भी जारी नहीं हो पा रही है। यह कहा जा रहा है कि सोमवार या मंगलवार तक सूची बाहर आ जाएगी। सचिन पायलट ने न्यूज़ एजेंसी को साक्षात्कार देकर यह संदेश तो दिया है कि केंद्रीय नेतृत्व ने विधानसभा का चुनाव किसी के चेहरे पर लड़ने के लिए मना कर दिया है। पार्टी सामूहिक रूप से चुनाव में उतरेगी। इसी बात से सीएम गहलोत परेशान है और उनकी सक्रियता में कमी आ गई है। बरसात का बहाना बनाकर राजीव गांधी ग्रामीण और शहरी ओलंपिक खेलों को भी 5 अगस्त तक स्थगित कर दिया है। गोविंद सिंह डोटासरा को अध्यक्ष बने हुए 3 साल पूरे हो गए पर उन्होंने कोई जश्न नहीं बनाया। संगठन में होने वाले बदलाव के कारण 3 साल पूरा होने के बावजूद भी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सन्नाटा छाया रहा। प्रदेश कांग्रेस के संगठन में इस बार तीन कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर काम हो रहा है। डॉ. रघु शर्मा या डॉ.महेश जोशी दोनों में से एक को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। इसके अलावा अगर गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो हरीश चौधरी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। ऐसे में गोविंद सिंह डोटासरा को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा भी है। यह भी कहा जा रहा है कि इस बार जातिगत समीकरण साधने के लिए संगठन और सत्ता दोनों में परिवर्तन किया जाना है। प्रताप सिंह खाचरियावास को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। मौजूदा तीन मंत्री महेंद्रजीत मालवीय, रामलाल जाट और गोविंद मेघवाल को उपाध्यक्ष पद से हटाए जाने की बात सामने आ रही है। गोविंद मेघवाल को भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। सचिन पायलट गुट से कार्यकारी अध्यक्ष किसको बनाया जाए अभी तय होना है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष के साथ ही विभिन्न प्रकोष्ठ भी बनाए जाने हैं। 25 सितंबर को बगावत करने वाले प्रमुख किरदारों को पद से हटाए जाने की चर्चा है। सचिन पायलट की 3 मांगो में से दो को मान लिया है। अब संदेश संगठन और सत्ता में बदलाव के बाद ही सामने आएगा। सचिन पायलट के समर्थित नेता और कार्यकर्ता यही कह रहे हैं कि जब तक सत्ता और संगठन में व्यापक बदलाव नहीं होगा तो विधानसभा के चुनाव को जीतना आसान खेल नहीं है। केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान में विभिन्न कमेटियों का गठन भी करने जा रहा है। इसमें चुनाव प्रचार कमेटी, चुनाव घोषणा कमेटी, टिकट वितरण कमेटी सत्ता और संगठन समन्वय कमेटी का गठन किया जाना संभव है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी बहुत चर्चाएं हैं। उन्हें किस हैसियत में रखा जाएगा अभी फैसला होना बाकी है। प्रदेश कार्यकारिणी इस बार ढाई सौ पदाधिकारी वाली होगी। इसके अलावा 26 जिला अध्यक्षों के नाम भी लगभग तय हो चुके हैं घोषणा होनी बाकी है। इस बात का सभी को इंतजार है कि यह सब कार्य पूरा होने के बाद भी सूची बाहर क्यों नहीं आ रही है ! आठ विधायक जो कि संगठन में महामंत्री है और निगम बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं उन्हें भी हटाए जाने की बात सामने आ रही है। चुनाव लड़ने वाले विधायकों को संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। ऐसा भी कहा जा रहा है कि सीएम गहलोत इस बीच कई निगम और बोर्ड के नामों को घोषित कर सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें साफ कहा है कि बिना उनकी अनुमति से किसी का नाम घोषित नहीं किया जाए। इसी के चलते मामला कुछ अटका पड़ा है। विधानसभा का सत्र 14 जुलाई से है और यह मात्र 5 या 6 दिन चलने वाला है। 14 जुलाई को विधानसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सम्मान भी होना है। सत्ता और संगठन में बदलाव के साथ ही राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मलिकार्जुन खरगे के दौरे भी होने हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त के पहले सप्ताह में प्रदेश कांग्रेस का एक बड़ा प्रांतीय सम्मेलन जयपुर में आयोजित किया जाना है। इसकी रूपरेखा भी लगभग तय कर ली गई है इसी में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को को आमंत्रित किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ता और नेताओं में अब यही इंतजार है कि सत्ता और संगठन में क्या बदलाव होगा! लंबे इंतजार के बावजूद भी सूची का जारी नहीं होना कई सवाल पैदा करता है। सीएम गहलोत को लगी चोटऔर उनकी चुप्पी और नाराजगी फैसलों में देरी का कारण बनी हुई है।