


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे समय से चला रहा विवाद और विधानसभा में कांग्रेस की सरकार को रिपीट कराने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी चिंतित और गंभीर हैं। कॉन्ग्रेस के संगठन और सत्ता में व्यापक बदलाव को लेकर गुरुवार को प्रातः काल 11:00 बजे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पार्टी मुख्यालय पर बैठक बुलाई है। इस बैठक में सचिन पायलट सहित करीब दो दर्जन नेताओं को बुलाया है। सीएम अशोक गहलोत दोनों पैरों में चोट के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस बैठक में शामिल होंगे। यह पहली बैठक होगी जिसमें सीएम गहलोत व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं रहेंगे बल्कि वर्चुअल तरीके से बैठक में होने वाले निर्णयओं साक्षी बन अपने विचार साझा करेंगे।
एआईसीसी अध्यक्ष खड़गे और राहुल गांधी की बैठक को लेकर दिल्ली में हलचल तेज है। एक दर्जन से ज्यादा मंत्री और 20 से अधिक विधायक 3 दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। आने वाले समय में कांग्रेस की सत्ता और संगठन में व्यापक बदलाव को लेकर अपनी स्थिति को बनाए रखने की कोशिश यह लोग विभिन्न स्तर पर सिफारिश कराने में जुटे हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में अस्थिरता का माहौल कायम है। केंद्रीय नेतृत्व इन सब चीजों को लेकर चिंतित और गंभीर है। परिस्थितियों में बदलाव और भाजपा को चुनौती देने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर निर्णय लेने कि इच्छा केंद्रीय नेतृत्व रखता है। आज का दिन राजस्थान कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, सीएम गहलोत-सचिन पायलट के भविष्य का फैसला भी अब संभव हो पाएगा।
एआईसीसी के अध्यक्ष खड़गे ने बैठक में 25 सितंबर के बगावत के प्रमुख किरदार संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी और राजस्थान पर्यटक विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर को नहीं बुलाया है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि हाईकमान निश्चित तौर पर उस घटना और सीएम गहलोत द्वारा मानेसर प्रकरण और विधायकों द्वारा पैसे लेने के आरोप को लेकर भी गंभीर और चिंतित हैं। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा समय-समय पर सीएम गहलोत को दिए गए निर्देशों की पालना नहीं होने से भी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में आपसी मतभेद कम होने की जगह ज्यादा होने की स्थिति बनी हैं।
एआईसीसी के अध्यक्ष खड़गे द्वारा बैठक में सीधे तौर पर तय किया जाना है कि आने वाले विधानसभा में किस किस नेता की की क्या जिम्मेदारी रहेगी और चुनाव में सरकार रिपीट कैसे हो इसकी रणनीति का भी फैसला किया जाना है। वैसे कहने को तो 3 दिनों से प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा दिल्ली में मौजूद है। उन्हें यह पूछा गया है कि आखिर किसके कहने पर प्रदेश कांग्रेस के 85 सचिव की नियुक्ति की गई। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति क्यों नहीं ली गई ! इन परिस्थितियों का जवाब दोनों नेताओं के पास नहीं है। यही कारण है कि उन पर सीधे तौर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि सीएम गहलोत और खुद के लोगों को समायोजित करने के लिए यह नियुक्तियां की गई।
अब नियुक्तियों पर रोक है और नए सिरे से नियुक्तियां की जानी है। ऐसा माना जा रहा है कि चुनाव में सक्रियता लाने के लिए कुछ मंत्रियों को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है ! इसके लिए उन्हें केंद्रीय नेतृत्व ने तैयार रहने को कहा है अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर मंत्रिमंडल में बदलाव की स्थिति बनेगी। लेकिन इस स्थिति को टालने के लिए सीएम गहलोत ने विधानसभा का सत्र 14 जुलाई से बुला लिया है। इसके अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सदन में सार्वजनिक अभिनंदन करने का कार्यक्रम भी रखा है। जिससे कि सीएम गहलोत विधायकों और मंत्रियों को व्यस्त रख सके। सीएम गहलोत विधानसभा के इस अल्पकालीन पूर्व विधानसभा के बजट सत्र को फिर से शुरू करा रहे हैं। बैठक में सीएम गहलोत यह भी कह सकते हैं कि मौजूदा परिस्थिति में मंत्रिमंडल में फेरबदल करना संभव नहीं है। लेकिन क्या केंद्रीय नेतृत्व इस बात को मानेगा या नहीं अभी बैठक में निर्णय होना बाकी है।
सीएम गहलोत सचिन पायलट की तीनों मांगों पर कार्यवाही करने की सहमति बना चुके हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्य सचिव उषा शर्मा को आवश्यक दिशा निर्देश देकर विधानसभा में विधेयक लाने की तैयारी को कहा है। अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल के घोटालों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन और पेपर लीक से प्रभावित युवाओं के लिए कोई रणनीति पर भी फैसला संभव है। बैठक में सचिन पायलट को बोलने का मौका दिया जाएगा और पार्टी की विधानसभा में जीत और सरकार रिपीट कैसे हो इसकी प्राथमिकता केंद्रीय नेतृत्व की रहेगी। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विभिन्न नेताओं के चुनावी दौरे की रणनीति, कुछ प्रभावशाली मंत्रियों को संगठन में लाने, सरकार की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ब्लॉक, ग्राम पंचायत अध्यक्ष और बूथ अध्यक्ष का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने, चुनाव संचालन समिति, घोषणा पत्र समिति, प्रदेश कार्यकारिणी में नए पदाधिकारियों और 26 जिला अध्यक्षों के निर्णय के बारे में भी फैसला किया जाना है।
एआईसीसी अध्यक्ष खड़गे और राहुल गांधी आज की बैठक में ही सचिन पायलट दी जाने वाली नई जिम्मेदारी तय करेंगे। उन्हें सीएम गहलोत के समकक्ष लाने के लिए राष्ट्रीय महामंत्री, सीडब्ल्यूसी का सदस्य, चुनाव संचालन समिति में प्रमुख भूमिका के साथ ही टिकट वितरण में बराबर की हिस्सेदारी देने पर विचार किया जा रहा है। इस बात से सीएम और उसके समर्थित नेता चिंतित है कि अगर टिकट देने की बराबर की हिस्सेदारी सचिन पायलट को मिली तो आने वाले विधानसभा के चुनाव में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।
अब तक केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों की पालना नहीं होने के कारण ही, अब नया छत्तीसगढ़ फॉर्मूला अपनाया गया है। उसी तरह के दिशा निर्देश राजस्थान के लिए जारी होने है। दिल्ली से लेकर पूरे प्रदेश में अब दोनों नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ ही प्रदेशवासियों को इंतजार है कि बैठक में क्या फैसला होगा !