


टोंक नगर परिषद टोंक ने मानसून में बाढ़ जैसे हालातों से निपटने के लिए तेयारियन शुरू की है। शहर के बड़े नालों की सफाई का अभियान युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है वही नगर परिषद टोंक में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
नगर परिषद टोंक के सफाई निरीक्षक सुनील मीणा ने बताया कि नगर परिषद टोंक इलाके में 49 बड़े नाले है जिनकी बारिश से पूर्व ही सफाई की जा रही है जिसके लिए करीबन 35लाख रुपए के टेंडर के के बिल्डर्स को दिए गए है।उन्होंने बताया कि नगर परिषद टोंक में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।साथ ही 8-8घण्टे की ड्यूटी के मुताबिक तीन टीमें बनाई गई है वही एक दर्जन सफाई कर्मचारियों की स्पेशल बचाव राहत कार्यो के लिए टीम गठित की गई है।यह टीम 24घण्टे उपलब्ध होगी।
मीणा ने बताया कि टोंक नगर परिषद की तरफ से बारिश के समय बाढ़ सहित जल भराव की समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद टोंक ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा चुकी है।
नगर परिषद टोंक ने मानसून की शुरुआत में ही शहर की सफाई व्यवस्था एवं नालों की सफाई का कार्य शुरू किया है। ताकि बारिश के समय टोंक में बाढ़ जैसे हालात पैदा नही हो।वैसे नगर परिषद टोंक की तरफ से शुरू किए गए बड़े एवं छोटे नालों की सफाई की मॉनिटरिंग की जा रही है।वही सफाई टेंडरदाता फर्म से नालों की सफाई कार्य की लोकेशन फ़ोटो सहित परिषद अधिकारियों की तरफ से निरीक्षण किया जा रहा है ताकि मानसून में बारिश के समय बाढ़ जैसे हालात पैदा नही हो।
नगर परिषद टोंक की तरफ से नालों की सफाई अभियान के तहत मोतीबाग कब्रिस्तान के दोनो तरफ का नाले, मोतीबाग से मुर्गीफार्म धन्नतलाई तक का नाला, बरखेड़ा बाबा से सोलंग पुरा तक का नाला,महादेवाली धर्मशाला के सामने का नाला, मोतीबाग की पाल वाला नाला,बावड़ी से रेडीवास तक का नाला, सिविल लाइन से मोदी की चौकी ,बड़ा कुंआ से पांच बत्ती तक,रोडवेज डिपो से जेल रोड तक,जेल रोड़ से डाइट रोड़ ,गादोलाई वाला नाला सहित कई बड़े नालों की सफाई की जा चुकी है।
पिछले सालों में सफाई व्यवस्था के अभाव में मानसूनी बारिश में कई इलाकों में बाढ़ के हालात होने से नालों ही नही बल्कि सडके तक तोड़ी गई थी जिससे पानी का निकास हो सकें।
नगर परिषद टोंक की तरफ से नालों की सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है ताकि पानी का निकास हो सकें।टोंक शहर में आबादी इलाको में ऐसे कई बड़े व छोटे नाले है जिनको लोगो ने या तो ढंक रखा है या फिर अतिक्रमण की चपेट में होने से न तो सफाई हो पाती न ही बारिश में पानी का निकास होने से बाढ़ के हालात पैदा होते है।