


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे विवाद का समाप्त होने का रास्ता अब नजर आने लगा है। गुरुवार को सीएम गहलोत के पैर फिसल जाने के बाद, उनके दोनों पैरों में चोट और माइनर फ्रैक्चर होने के बाद, डॉक्टरों द्वारा आराम की सलाह दी गई है। डॉक्टरों द्वारा आराम की सलाह के बाद 3 जुलाई की बैठक स्थगित जाएगी या फिर सीएम गहलोत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़े जाने की बात का निर्णय होगा। डॉक्टरों की सलाह के आधार पर, उन्हें दिल्ली आने की अनुमति मिल सकती है।
लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की मौजूदगी में 3 जुलाई को कांग्रेस मुख्यालय दिल्ली में बैठक आयोजित करने का फैसला हुआ है। इस बैठक में इस मसले पर विचार करके सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए राहुल और खरगे की मौजूदगी में पूर्व में तय फार्मूले को लागू किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि राजस्थान में संगठन और सत्ता में व्यापक फेरबदल किए जाएंगे। चुनाव जीतने की दृष्टि से दोनों नेताओं को स्पष्ट तौर पर निर्देश दिए जाएंगे। अब केंद्रीय नेतृत्व सीएम गहलोत को बदलाव के लिए आग्रह नहीं करेगा, बल्कि स्पष्ट तौर पर संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल राहुल और खरगे के निर्देशों की पालना के लिए आदेश जारी करेंगे। उन आदेशों के अनुपालन करना सीएम गहलोत की मजबूरी होगी, जैसा कि छत्तीसगढ़ में हुआ है। सीएम गहलोत और सचिन पायलट को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि वे पार्टी के कार्य को प्राथमिकता देकर पूरा करें। साढ़े 3 साल से अटके पड़े जिला अध्यक्षों और प्रदेश कार्यकारिणी का भी फैसला कर दिया गया है। इस बारे में भी शीघ्र सूची जारी की जाएगी।
सीएम गहलोत ने शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक यथावत रखने के फैसले से यह स्पष्ट हो रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व के कड़े रुख के चलते अब राजस्थान का मसला भी लगभग तय माना जा रहा है। कैबिनेट की बैठक में सीएम गहलोत मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों का सामूहिक रूप से इस्तीफा ले सकते हैं। सीएम गहलोत केंद्रीय नेतृत्व को यह संदेश देने का काम करेंगे कि अब जो भी निर्णय केंद्र करेगा वह उसके अनुरूप मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा संगठन में भी परिवर्तन किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
सचिन पायलट को क्या जिम्मेदारी दि जाए इस पर मंथन चल रहा है। अब यह माना जा रहा है कि सचिन पायलट की उठाई गई मांगों और दी जाने वाली जिम्मेदारी के बारे में आपसी सहमति से मामला सुलझ जाए। इस बार सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष या एआईसीसी जनरल सेक्रेट्री के साथ ही कांग्रेस वर्किंग कमिटी (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य और टिकट बांटने की जिम्मेदारी में बराबर हिस्सेदारी देकर चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा जोरों पर है। भाजपा को इस पर संदेश देने के लिए इस बार केंद्रीय नेतृत्व कोई भी ऐसी गलती नहीं करेगा जिससे कि यह सामने आए कि कांग्रेस में निर्णय के बाद भी आपसी कलह और विवाद बरकरार है।
राहुल गांधी मणिपुर दौरे पर हैं वे 1 जुलाई को वापस लौट आएंगे। दिल्ली में आयोजित होने वाली बैठक में इस बार सीएम गहलोत, सचिन पायलट के साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पंजाब के प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी, भंवर जितेंद्र सिंह सहित कुछ और नेताओं को बुलाए जाने की संभावना है।
सीएम गहलोत द्वारा शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में क्या कुछ फैसला होगा उस से स्पष्ट हो जाएगा कि आने वाले समय में केंद्रीय नेतृत्व का राजस्थान के बारे में क्या फैसला आने वाला है। प्रदेश की जनता के साथ-साथ सीएम गहलोत और सचिन पायलट समर्थकों और नेताओं को इसी बात का इंतजार है कि अब क्या कुछ होने वाला है !