Saturday, 29 August 2026

पायलट 31 मई को टोंक आएंगे, कार्यकर्ताओं-नेताओं में उत्साह, गहलोत-पायलट विवाद सुलह विधानसभा टोंक का पहला दौरा


पायलट 31 मई को टोंक आएंगे, कार्यकर्ताओं-नेताओं में उत्साह, गहलोत-पायलट विवाद सुलह विधानसभा टोंक का पहला दौरा

सोमवार को ही दिल्ली में मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच हुई सुलह के बाद बुधवार को सचिन पालयट एक दिवसीय कार्यक्रम के तहत टोंक आएंगे। पायलट 31 मई को टोंक विधानसभा क्षेत्र के गांवों में जनभव अभियोग सुनेंगे और ग्रामीणों को सम्बोधित करेंगे। 

पायलट की दिल्ली में हुई सुलह बैठक के बाद टोंक का पहला दौरा होगा। आखिर सवाल उठता है कि क्या दिल्ली बैठक में पायलट ने सीएम से  विवाद के बाद टोंक की जनता की प्रमुख मांग और चुनावी वायदे टोंक को रेल से जोड़ने को लेकर राज्य सरकार की तरफ से अलग से विशेष बजट दिए जाने का भी मुद्दा उठाया ताकि टोंक को रेल से जुड़ने की मांग पूरी हो सकें।

जिला कांग्रेस कमेटी टोंक के पूर्व जिलाध्यक्ष लक्ष्मण गाता ने बताया कि क्षेत्रीय विधायक सचिन पायलट 31मई को  सुबह 9 बजे टोडारायसिंह पंचायत समिति की ग्राम पंचायत  इंदोकिया के ग्राम कुहाड़ा बुर्ज में और सुबह 9.45 बजे ग्राम अलीयारी में, 10.30 बजे ग्राम बांसखारोलान,11.15बजे ग्राम लाम्बाकलां ,दोपहर 12बजे ग्राम बावडी में ग्रामीणों और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और  ग्रामीणों की समस्याओं की सुनवाई करेंगे।

पूर्व जिलाध्यक्ष लक्ष्मण गाता ने बताया कि दिन में एक बजे भूतेश्वर महादेव पार्क सवाईमाधोपुर चौराहा टोंक  में टोंक विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की बैठक को सम्बोधित करेंगे। पिछले सालों से  सीएम गहलोत  और  टोंक विधायक सचिन पायलट के बीच सीएम कुर्सी विवाद से चल रही खींचतान दिल्ली में आयोजित बैठक में खत्म हो जाने के बाद सचिन पायलट का यह पहला टोंक दौरा है। इससे पायलट समर्थको में उत्साह का माहौल है। लेकिन दूसरी तरफ आमजन का कहना है कि गहलोत  और पायलट के बीच शुरू हुई जुबानी जंग के बाद पायलट से डिप्टी सीएम सहित अन्य विभिन्न विभागों  और प्रदेश अध्यक्ष की छीनी गई कुर्सी के बाद टोंक विकास की दृष्टि से पिछड़ गया। इतना ही नहीं सीएम गहलोत बजट घोषणा में जो अन्य जिलों को मिला । वही काम टोंक में हुए है लेकिन अलग से कोई नया प्रोजेक्ट नही मिला। 

क्या अब छह महीने में टोंक को रेल लाइन से जोड़ने ,औद्योगिक फैक्ट्रियों सहित अन्य चुनावी वायदे पूरे कर पाएंगे। इतना ही नही पायलट समर्थक दो गुटों को एक मंच पर लाना भी पायलट के लिए महत्त्वपूर्ण चुनोती होगी। 

वही टोंक की जनता ही नही वरन रेल लाओ संघर्ष समिति टोंक के अध्यक्ष अकबर खान की अगुवाई में सचिन पायलट के समर्थन में खुले  रूप से चुनाव में ही नही बल्कि कोई भी कार्यक्रम हो या आंदोलन में भीड़ जुटाने में कोई कमी नही छोड़ी। इतना ही नही टोंक कार्यक्रमो में निजी खर्च से 51किलो की माला और  भव्य आतिशबाजी से स्वागत  किए जाने में पीछे नहीं रहे। क्या अकबर खान की तरफ से टोंक को रेल लाइन से जोड़ने के लिए किए गए आंदोलन के सकारात्मक परिणाम छह महीने में मिल पाएगा?

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