


भ्रष्टाचार के खिलाफ और पेपर के मामले में युवाओं को न्याय दिलाने के लिए निकाली जा रही सचिन पायलट की जन संघर्ष पद यात्रा रविवार को चौथा दिन है। अब जयपुर जिले में प्रवेश करने के बाद पदयात्रा में भीड़ बढ़ रही है और समर्थन भी लोगों का मिलने से पार्टी संगठन में हलचल और तेज हो गई है।
प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा ने अपना स्वर बदल लिया है वह बोल रहे हैं कि सचिन को कुछ इंतजार करना चाहिए था अभी समय नहीं था। उन्होंने सचिन पायलट को अपना छोटा भाई बताते हुए पारिवारिक रिश्ते की बात कही और कहा कि इससे पहले वह कह रहे थे कि रिपोर्ट हाईकमान को अब यह सब कुछ बदला बदला नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी नागौर में अपना स्पष्ट देते हुए कहा कि मैंने वसुंधरा राजे को लेकर यदि कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मेरी सरकार बचाई थी। उन्होंने कहा कि मेरे बयानों को तोड़ का छापा गया। अब सीएम गहलोत के तेवर भी बदल गए हैं।
कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद अब हाईकमान का सीधे तौर पर राजस्थान की ओर नजर जाएगा। कोशिश यही होगी कि किसी तरह से पायलट और सीएम गहलोत के बीच तालमेल हो जाए। मामला पेचीदा है लेकिन अब इसका कुछ ना कुछ तो हल निकलेगा।कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे निश्चित तौर पर अब यहां के विवाद को सुलझाने में प्राथमिकता देंगे। कर्नाटक चुनाव में जिस प्रकार से उन्होंने दोनों नेताओं को एक करके चुनाव लड़ने का जो सिलसिला दिखाया उससे राजस्थान की पेचीदा स्थिति भी समाप्त हो सकती है। यह बात सही है कि मलिकार्जुन खरगे खुद राजस्थान की स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं और इसका हल वह खुद ही निकाल सकते हैं। यह निश्चित तौर पर कहा जा रहा है कि सचिन पायलट को लेकर अब कोई बयानबाजी सामने नहीं आएगी।