


पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की जन संघर्ष पदयात्रा शुक्रवार दूसरे दिन किशनगढ़ टोल से सुबह 8:00 बजे शुरू होगी। उनकी यात्रा में अब पहले से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं और उनको जन समर्थन मिलना शुरू हो गया है।वहीं दूसरी ओर जयपुर से दिल्ली तक पार्टी के बड़े नेताओं में इस बात की हलचल पैदा हो गई है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच आपसी समझौता नहीं हुआ तो निश्चित तौर पर आने वाले चुनाव में इसका विपरीत असर देखने को मिलेगा।
कहने को तो कांग्रेस प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार को दिल्ली में तीनों से तीनों सह प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की बैठक बुलाई है। इस बैठक में निश्चित तौर पर सचिन पायलट की जन संघर्ष पदयात्रा पर विचार विमर्श किया जाएगा और एक रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को सौंपने की बात सामने आ रही है।लेकिन यहां सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे को निश्चित तौर पर दोनों के बीच में समझौता कराने के लिए आगे आना पड़ेगा नहीं तो यह विस्फोट पार्टी को डैमेज करेगा। अब कर्नाटक चुनाव के परिणाम के बाद ही राजस्थान की स्थिति पर नजर जाएगी और कुछ निर्णय निश्चित तौर पर होना संभव सा लग रहा है !
सीएम गहलोत ने जयपुर में आयोजित कांग्रेस के वरिष्ठ स्वर्गीय नेता नवल किशोर शर्मा की मूर्ति के अनावरण के दौरान जो छींटाकशी की वह भी सबके सामने है। अब भ्रष्टाचार के खिलाफ सचिन पायलट ने लोगों के बीच जो कुछ कहा उससे असर भी देखने को मिल रहा है। सरकार आरपीएससी के गिरफ्तार सदस्य बाबूलाल कटारा के निवास को तोड़ने की कार्रवाई की जा सकती है।
विवाद बरकरार है कार्यकर्ता एकता की जगह बिखराव की स्थिति की स्थिति पैदा हो गई हैं। सचिन पायलट को अजमेर कॉन्ग्रेस संगठन का समर्थन मिला। यह बात सही है कि पूर्व विधायक और प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष नसीम अख्तर,पूर्व विधायक डॉ गोपाल बाहेती और कुछ अन्य नेता भी सचिन पायलट के कार्यक्रम से दूर रहे । वहीं निवर्तमान अजमेर कांग्रेस के अध्यक्ष विजय जैन, महेंद्र सिंह रलावता, पूर्व विधायक रामचंद्र और गुर्जर नेताओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बयान जारी कर कहा कि सचिन पायलट की यात्रा निजी यात्रा है इसमें कांग्रेस का कोई लेना देना नहीं है। इस बयान के बावजूद भी प्रदेश कांग्रेस के कई नेता इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अजमेर पहुंचे और अब दूसरे दिन भी यात्रा में शामिल है। अब चाहे कुछ भी कहे लेकिन हाईकमान यदि इसमें सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगा तो यह खाई और गहरी होती जाएगी जिसका खामियाजा पार्टी संगठन के साथ-साथ विधानसभा के चुनाव पर भी विपरीत असर पड़ेगा।