


कांग्रेस के प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावाअपने अपने बयानों के कारण विवादित होते नजर आ रहे हैं। वे बार-बार कुछ ऐसे जल्दबाजी में बयान दे देते हैं कि उन्हें अपने ही बयान को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने सचिन पायलट के अनशन को लेकर जो कुछ कहा और अब उस विवाद पर बोलने से कतरा रहे हैं उन्हें नहीं पता था कि उनके बयान से कुछ होने वाला नहीं है।
प्रभारी रंधावा कोरोनाकाल के समय कांग्रेस की राजनीति में घटी घटनाक्रम पर बोलने से बचते हैं और मौजूदा स्थिति को सही करने की बात भी कहते हैं। प्रभारी रंधावा अभी तक सचिन पायलट से मुलाकात नहीं कर पाए हैं और ना ही अशोक गहलोत से उनकी मुलाकात कराने में सफल हो रहे हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश की राजनीति पर निगरानी करने के लिए तीन सह प्रभारी लगाकर यह संदेश दे दिया है कि प्रभारी रंधावा अकेले नहीं है पार्टी की गतिविधियों की निगरानी के लिए और भी सह प्रभारी मौजूद है। आने वाले समय में कांग्रेस की गतिविधियां और बढ़ेगी।
प्रभारी रंधावा ने पार्टी में अपनी गतिविधियों को तेज करने के लिए सिविल लाइन के एक अपार्टमेंट में फ्लैट किराए पर लेने की भी चर्चा जोरों पर है। अब रंधावाअपना कार्यालय प्रभावी ढंग से संचालित करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। इस कार्यालय में तीनों से प्रभारियों की गतिविधि भी देखने को मिल सकती है। कांग्रेस का कार्यकर्ता और नेता पहले ही कांग्रेस कार्यालय दो जगह होने से बट गया है और अब तीसरा प्रभारी का कार्यालय होने से गतिविधियों में कहां अधिक भीड़भाड़ देखने को मिलेगी यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का निवास पहले से ही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं का केंद्र बिंदु है। लेकिन यहां पर उन लोगों को ही महत्व दिया जाता है जिन्हें सीएम गहलोत या उनके स्टाफ आने की अनुमति देता हैं। कांग्रेस का आम कार्यकर्ता और नेता किसके पास जाएं यह असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सीएम गहलोत का निवास के अलावा सचिन पायलट के निवास पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं नेताओं की गतिविधि देखने को मिलती है।
अब नया केंद्र बिंदु विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी का निवास स्थान भी बनने जा रहा है। अब चाहे कुछ भी कहो गतिविधियां कहां कैसे बढ़ेगी यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा। लेकिन कांग्रेस की एकता को बनाए रखने के लिए प्रभारी रंधावा को जो जिम्मेदारी हाईकमान ने सौंपी उसमें वे पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहे हैं उनकी कार्यशैली पर निश्चित तौर पर कई सवाल जरूर उठते हैं। वे कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच रहने की वजह सत्ता के साथ रहकर वही देख पा रहे हैं जो सीएम गहलोत या उनके समर्थक उन्हें दिखा रहे हैं।
13 मई के बाद निश्चित तौर पर हाईकमान की नजर राजस्थान की और आएगी। अभी तक यही कहा जा रहा है कि ना तो मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा और ना ही कोई और बदलाव होगा। लेकिन सचिन पायलट से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जो वादे किए थे। उनका निर्णय निश्चित तौर पर कांग्रेस की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा। लेकिन फिलहाल अनिश्चितता का वातावरण पार्टी को बिखराव की ओर धकेल है। ऐसे में जो भी बयानबाजी हो रही है वह कितनी सार्थक होगी यह तो अभी आने वाला समय ही बता पाएगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का निर्णय भी अभी तक नहीं हुआ है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक लाइन का प्रस्ताव हाईकमान को भेजा था । लेकिन उसका फैसला भी 5 महीने बाद भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मौजूदा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अपने कार्य को गति नहीं दे पा रहे हैं। कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेता उन्हें आज भी विश्वास के साथ नहीं कह पाते हैं कि वह रहेंगे या नहीं । यही स्थिति ही प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करती है कि उनमें दम कितना है। प्रभारी रंधावा जी आपको पता है कि राजस्थान में आधा दर्जन से अधिक नेता ऐसे हैं किजिनकी हैसियत हाईकमान के यहां आप से अधिक है। यही कारण है कि आप अभी तक उन नेताओं के पास नहीं पहुंच पा रहे हैं और ना ही वह आपके बैठकों में आकर आपकी बात कह पा रहे हैं।
कांग्रेस में दो प्रभारी तो बदल गए हैं और आप कितने दिन रहेंगे यह किसको पता नहीं। ऐसे में आप अपने कद को बनाए रखो और आम कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच रहकर उनकी बात कहो और उनकी बात सुनो । आप तो कांग्रेस को मजबूत करने में लग जाओ नहीं तो आपका भविष्य उज्जवल होगा नहीं तो अन्य प्रभारियों की तरह आप भी खो जाओगे। चलो अब हम सब इंतजार करते हैं कि कर्नाटक चुनाव का परिणाम क्या होगा । उसी के निर्णय से राजस्थान की राजनीति में भी बदलाव आने की संभावना अधिक लगती है।