


गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने समलैंगिकता को मान्यता देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले को मानवता के लिए कलंक बताया और कहा कि जजों को भी प्रकृति दंड देगी।उन्होंने कहा कि समलैंगिकता उसे पशुता की भावना आएगी जो की प्रकृति के खिलाफ है।
मानसरोवर स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर में गुरुवार को गुरु दीक्षा कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जजों को पूछना चाहिए कि क्या आप नपुसंक होकर नपुसंक से शादी कर चुके हो क्या ? उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि मानवता के लिए कलंक है। उन्होंने कहा कि आक्रोश है तो पुरुष से शादी कर चुके हैं क्या आप स्त्री हैं तो स्त्री से शादी कर चुके हैं क्या? उन्होंने कहा कि इस गलत प्रवृत्ति से व्यभिचार बढ़ेगा उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में विवाह धार्मिक क्षेत्र में पहला स्थान रखता है यह लोगों के क्षेत्र का विषय है ना कि न्यायालय का।
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि यदि न्यायालय कोई फैसला ऐसा देता है तो उसे बांधने की आवश्यकता नहीं है यह हमारा मामला है इसमें कोर्ट को नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को भी कह देना चाहिए कि प्रकृति उन्हें भी ठंड देगी ।
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि मैकाले 3 सी ने भारत को अस्तित्व और आदर्श विहीन बनाने के लिए गया था। पहले सी का अर्थ है क्लास और को एजुकेशन दूसरे सी का अर्थ हैं और क्लब 3सी का अर्थ है। मैकाले द्वारा दिया हुआ यह षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि उसी का अनुबंध करके देश का अस्तित्व और आदर्श विकृत करने का प्रकल्प चल रहा है।