Saturday, 29 August 2026

रंधावा जी के शक्ति प्रदर्शन के लिए लेकर हो रहा है विधायकों का रूबरू कार्यक्रम और प्रदेश स्तरीय सम्मेलन !


रंधावा जी के शक्ति प्रदर्शन के लिए लेकर हो रहा है विधायकों का रूबरू कार्यक्रम और प्रदेश स्तरीय सम्मेलन !

कांग्रेस की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आने की स्थिति बन गई है। प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा सचिन पायलट के गतिरोध को तो दूर नहीं करा पाए। लेकिन अब उन्होंने प्रदेश में विधायकों से रूबरू होने का 17 अप्रैल से कार्यक्रम शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस रूबरू के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम 3 दिन तक चलेगा इसमें अलग-अलग संभाग की बैठकें कॉन्ग्रेस के नए  वार रूम में रखी गई है। 

सीएम गहलोत ने भी कहा है कि वे विधायकों से यह जानने का प्रयास करेंगे कि उन्हें किस प्रकार के काम का चाहिए और आगे किस रणनीति के तहत पार्टी को मजबूत बनाया जा सकता है।  सवाल अब यहां यह उठता है कि मौजूदा परिस्थिति में विधायकों से रायशुमारी करने का क्या औचित्य है ! प्रभारी रंधावा  की कोशिश है कि इसी तरह से वे यह जता सके कि हाईकमान उन्हीं की बात को सुनकर निर्णय करेगा। ऐसे में कांग्रेस और समर्थक विधायकों से बातचीत का सिलसिला फिर शुरू हो रहा है। 

17 अप्रेल को अजमेर, टोंक, नागौर, भीलवाड़ा, जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, सिरोही और जालौर जिलों के विधायकों से वन-टू-वन संवाद, 18 अप्रेल को उदयपुर, चित्तौडग़ढ़, प्रतापगढ़, डूॅंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमन्द, कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, भरतपुर, धौलपुर, करौली,  सवाई माधोपुर  और 20 अप्रेल को बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, अलवर, दौसा, सीकर और झुन्झुनूं जिलों के विधायकों से वन-टू-वन संवाद का कार्यक्रम घोषित किया है। 

वही राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी  ने 19 अप्रेल को जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में प्रात: 11 बजे से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन करने का ऐलान किया है। कार्यशाला में एआईसीसी और पीसीसी डेलीगेट्स, प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी, सांसद, सांसद प्रत्याशी, पूर्व सांसद, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष, विधानसभा के पूर्व प्रतिपक्ष नेता, मंत्रीमण्डल के सदस्य, विधायक, विधायक प्रत्याशी, पूर्व विधायक, जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष, अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी, विभाग और प्रकोष्ठों के प्रदेशाध्यक्ष, जिला प्रमुख, प्रधान, नगर निकाय के अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष और मण्डलों के अध्यक्ष को बुलाया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि पूरा संगठन नहीं बन पाया है तो इस अधूरे संगठन के पदाधिकारियों को बुलाकर आखिर क्या कुछ निर्णय होगा ! संगठन पूरा बनने के बाद आयोजन निश्चित तौर पर कांग्रेस को मजबूत बना सकता है।

प्रभारी  रंधावा जी अब आप ही बताओ कि प्रदेश स्तरीय सम्मेलन की जरूरत आपको क्यों पड़ रही है। इन सब कार्यक्रमों से कांग्रेस में गुटबाजी उजागर होगी और उसका फायदा किसको कैसे मिलेगा यह तो आप ही बता सकते हैं। वहीं दूसरी ओर सचिन पायलट ने 17 अप्रैल को झुंझुनू जिले के खेतड़ी में कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला कर रखा है। वे आगे भी किसान सम्मेलन के माध्यम से अपना शक्ति परीक्षण करने की इच्छा रखते हैं। ऐसे में आपसी समन्वय कौन कराएगा इस पर भी सवाल खड़े होते हैं। 

प्रदेश में आपसी नेताओं की गुटबाजी के चलते ही पूर्व प्रभारी अविनाश पांडे और अजय माकन को प्रदेश छोड़कर जाना पड़ा। अब  अब प्रभारी रंधावा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं कि वे प्रदेश के नेताओं की गुटबाजी को खत्म करने की जगह बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। यहां पर निश्चित तौर पर राहुल गांधी,प्रियंका गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे को विशेष ध्यान देकर सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच कोई समन्वय का रास्ता ढूंढना चाहिए। सरकार का कामकाज और योजनाएं निश्चित तौर पर अच्छी है। लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में अधिक सक्रिय होकर काम करेंगे तो निश्चित तौर पर कोई नया रिजल्ट आएगा। सरकार की योजनाओं और अच्छे काम का की बदौलत सरकार का रिपीट होना संभव नहीं है इसके साथ कार्यकर्ताओं  और  नेताओं का सहयोग भी आवश्यक है। नहीं तो रिजल्ट के लिए निश्चित तौर पर अनिश्चितता का माहौल बन जाता है। 

प्रभारी रंधावा जी आप खुद ही बताइए कि इस तरह की बैठकों से क्या कुछ रिजल्ट निकलने वाला है और विधायकों की मांग के अनुरूप अगर कुछ हो भी जाएगा तो मजबूत कौन होगा यह तो आप ही बताएं। परिस्थितियां निश्चित तौर पर पार्टी के कार्यकर्ता और नेताओं में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसे खत्म करने की जरूरत है। इसको लेकर अब पहल कौन करें तय नहीं हो पा रहा है। विधायकों को संतुष्ट करने से काम चलने वाला नहीं है अब तो कार्यकर्ताओं और नेताओं को संतुष्ट करने से ही पार्टी में सक्रियता आएगी और  इसी के चलते ही शासन में फिर से आने की बात बनेगी !

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