


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अगर शेखावत संजीव क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के मामले में मुलजिम नहीं है तो उन्होंने हाईकोर्ट से जमानत क्यों ली और भी इस मामले को सीबीआई जांच के लिए क्यों आए हुए हैं। उन्होंने गजेंद्र सिंह शेखावत को सलाह देते हुए कहा कि वे एसओजी के पास जाएं और अपना पक्ष रखें उन्होंने कहा कि वह बेशर्म आदमी है उन्होंने अपनी राजपूत जाति के लोगों के साथ ही फ्रॉड किया है।
सीएम गहलोत ने रविवार को पुलिस अकैडमी में पुलिस स्थापना दिवस के समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पीड़ित लोग के कई करोड़ रुपए डूबे हुए हैं उन्हें नहीं देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब तो स्पष्ट हो गया है कि वह इस मामले में दोषी हैं। सीएम गहलोत ने कहा कि अगर यूपी जैसा प्रदेश होता तो अब तक गजेंद्र सिंह शेखावत जेल के अंदर होते। उन्होंने कहा कि राजस्थान की ऐसी परंपरा नहीं है कि हम बदले की भावना से उन्हें अंदर डालें।
सीएम गहलोत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी कटाक्ष नशा और कहा कि वे खुद गृहमंत्री और सहकारिता मंत्री हैं ऐसे में उन्हें ऐसे केंद्रीय मंत्री के खिलाफ पूरे मामले की जांच कर दंडित करना चाहिए वह नहीं कर रहे। सीएम गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार ने विगत 4 साल में 76 हजार करोड़की राशि प्रदेश को नहीं दी प्रदेश को नहीं दी। उन्होंने कहा कि अगर यह पैसा आता तो निश्चित तौर पर प्रदेश का विकास तेजी से हो सकता था। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राजनीति करते हुए रिफाइनरी का काम रोक दिया है।
सीएम गहलोत ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी मुझे अपना मित्र बताकर राजनीति कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि वे अब तक तीन बार प्रदेश का दौरा कर चुके हैं और और यहां आने का कोई न कोई बहाना ढूंढते रहते हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के लिए वे कुछ भी करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता को मैंने बजट के माध्यम से कई ऐसी योजनाएं दी है जिसके कारण उन्हें आने वाले दिनों में महंगाई से जबरदस्त राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की एक करोड़ 4 लाख लोगों के बिजली के बिल जीरो आने लगेंगे। राखी के बाद 40 लाख महिलाओं को स्मार्टफोन दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरी सोच आम लोगों के बीच रहकर उनकी मदद करना है और केंद्र सरकार सत्ता लाने के लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार है। अब प्रदेश के लोगों को ही निर्णय करना है कि उनके हित में क्या कुछ है।