


राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद अब कांग्रेस के प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा के सुर बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि मैंने सचिन पायलट के मामले की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। बड़े नेताओं से बातचीत हुई है। फ़िलहाल पायलट को कोई नोटिस नहीं दिया है बल्कि आगे की बातचीत चल रही है। राहुल गांधी के समक्ष सारी बात हुई है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल को क्या निर्देश दिए हैं अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। रंधावा ने स्वीकार किया कि फिलहाल सचिन के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई करने का विचार नहीं है अभी वक्त लगेगा
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी सचिन पायलट की लंबी मुलाकात हुई। इससे पहले उनकी मुलाकात राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे, संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात हुई । इन सब नेताओं की बातचीत और राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद मामले में कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया गया । अब यह कोशिश हो रही है कि किसी तरह से कोई बीच का रास्ता निकाल लिया जाए। जिससे कि इस राजनीतिक तूफान को फिलहाल शांत किया जाए। इस बदले में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब प्रभारी रंधावा के सूर भी बदल गए हैं।
जबकि प्रभारी रंधावा यह दावा कर रहे थे कि सचिन ने अनुशासनहीनता की है मैं उनके खिलाफ कार्रवाई कराकर रहूंगा।लेकिन प्रश्न यह उठता है कि आखिर प्रभारी रंधावा सचिन पायलट के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कराने के इच्छुक क्यों थे !
वहीं दूसरी ओर सचिन पायलट ने एक बार फिर से प्रदेश के फील्ड में जाकर अपने कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। इसी रणनीति के तहत आगामी 17 अप्रैल को सचिन पायलट ने पहला कार्यक्रम झुंझुनू जिले के खेतड़ी में कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है।
जयपुर में आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के घोटालों की जांच कराने को लेकर 1 दिन की क्रमिक अनशन के बाद सचिन पायलट दिल्ली गए थे। उन्होंने बुधवार को ही प्रियंका गांधी से मुलाकात की इसके बाद गुरुवार को राहुल गांधी से भी उनकी मुलाकात होने की बात कही जा रही है।
राजनीति में यह सही कहा जाता है कि राजनीति में जो होता है वह दिखता नहीं । यह बात सही है कि केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान के मसले पर कोई ध्यान नहीं दे पा रहा था लेकिन अनशन के बाद अब यहां के मसले पर भी केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान गया है और आने वाले समय में निश्चित तौर पर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा और कांग्रेस में उठे तूफान को शांत करने की कोशिश होगी।