Saturday, 29 August 2026

प्रभारी रंधावा की धमकी का कोई असर नहीं, सचिन का मौन व्रत अनशन का कार्यक्रम बरकरार, पार्टी की गतिविधि का सबको है इंतजार !


प्रभारी रंधावा की धमकी का कोई असर नहीं, सचिन का  मौन व्रत अनशन का कार्यक्रम बरकरार, पार्टी की गतिविधि का सबको है इंतजार !

आखिर सचिन पायलट ने पार्टी के प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा के प्रयासों को नहीं माना है और उन्होंने शहीद स्मारक पर मंगलवार को प्रातः काल 11:00 से शाम 5:00 बजे तक अनशन करने के निर्णय को बरकरार रखा है। हालांकि प्रभारी रंधावा ने बयान जारी कर पायलट के अनशन को पार्टी विरोधी गतिविधियां करार दिया है और कहा है कि वे इसे टाले और पार्टी स्तर पर बातचीत की जाए तो निश्चित कोई हल निकल पाएगा।  प्रभारी रंधावा की देर रात को दी गई धमकी का सचिन पायलट पर कोई असर नहीं हो रहा है।

अब चाहे कुछ भी कहो पायलट ने अनशन की तैयारी पूरी कर ली है वे अपने समर्थकों के साथ मौन व्रत पर बैठेगे। अब कांग्रेस के कार्यकर्ता उनका समर्थन कितना देते हैं यह तो समय ही बताएगा। लेकिन यह बात सही है कि उनके धरने के लिए प्रदेशभर से कार्यकर्ताओं का आना जयपुर शुरू हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक पैमाने पर तैयारी की गई है पुलिस फोर्स लगाया गया है।

प्रभारी रंधावा पायलट के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई करने में तो कतरा रहे हैं और  वे पायलट को अभी उन्हें पार्टी की परिसंपत्ति और धरोहर बताकर उन्हें यही कह रहे हैं कि यह समय गलत है पार्टी स्तर पर बातचीत की जाए तो  मसला सुलझ सकता है।

प्रभारी रंधावा के जयपुर पहुंचने की भी सूचना नहीं है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से जो बयानबाजी हो रही है उससे भी लग रहा है कि पायलट को रोकना संभव नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीधे तौर पर कोई बयानबाजी नहीं की है। लेकिन उनके समर्थक मंत्री राजस्व मंत्री रामलाल जाट कह चुके हैं कि सीएम गहलोत  1 फीट की दीवार बनाते हैं और सचिन पायलट 2 फीट की दीवार गिरा देते हैं। ऐसे में पार्टी की स्थिति कैसे सुधरेगी उनका कहना है कि सीएम गहलोत ने शानदार बजट दिया है और उससे पार्टी मजबूत होगी। वहीं दूसरी ओर खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खचारियावास सीधे तौर पर कहते हैं कि सचिन पायलट ने जो मुद्दा उठाया है वह गलत नहीं है इसकी जांच होनी चाहिए।

पार्टी प्रभारी रंधावा के बयान के बाद सचिन पायलट का धरना अगर सफल होता है तो निश्चित तौर पर आगे की रणनीति और कारगर होगी। पार्टी अगर कोई कार्यवाही करती है तो नुकसान किसको होगा यह भी कहना संभव नहीं है ! लेकिन यह भी पता है कि प्रभारी रंधावा की धमकी से कुछ होने वाला नहीं है। वे कई बार संगठन बनाए जाने को लेकर ऐलान कर चुके हैं लेकिन उनका कहां हुआ अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। 

सचिन पायलट को टोंक का विधायक ही माना जाए और उन्हें अजमेर संभाग  के कार्यकर्ता सम्मेलन में बुलाया जाए यह कहां तक सही है इसका जवाब भी प्रभारी रंधावा को ही देना होगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी उन्हें राष्ट्रीय स्तर का नेता मानकर पार्टी की गतिविधियों के प्रचार प्रसार के लिए पूरे देश में भेजने का काम करती है।  सचिन पायलट को अब प्रभारी के माध्यम से अपने मुद्दे हाईकमान तक पहुंचाने की बात कही जा रही है। जबकि सबको पता है कि उनकी बात किस स्तर पर हुई और उसका नतीजा क्या निकला कोई बताने को तैयार नहीं है।  

सोनिया गांधी के स्तर पर सचिन पायलट की बातचीत  हुई थी और शीघ्र  फैसले की बात पार्टी के संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल ने सार्वजनिक तौर पर कही थी। लेकिन अब  केसी वेणुगोपाल कुछ बोलना नहीं चाहते।  राष्ट्रीय प्रवक्ता जयराम रमेश कहते हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार के कामकाज को लेकर चुनाव लड़ा जाएगा लेकिन सचिन पायलट के बारे में कुछ कहने से कतराते हैं। लेकिन सचिन पायलट को भी कोई आपत्ति नहीं है कि सरकार के कामकाज को लेकर चुनाव लड़ा जाए उनका मसला तो कुछ और है जिस पर बातचीत करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व तैयार नहीं है। अब पार्टी की जिस लेवल पर बातचीत हो रही है वह ठीक नहीं है। बातचीत तो दिल्ली में होगी अगर हाईकमान प्रभारी रंधावा बन जाते हैं तो मामला सुलझने की जगह और पेचीदा बन जाएगा। चलो सचिन पायलट का अनशन शुरू होने दो और पार्टी मेंइसको लेकर पार्टी में क्या गतिविधि होती है इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा !



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