


सचिन पायलट द्वारा पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच को लेकर 1 दिन के अनशन के ऐलान के बाद कांग्रेस में हलचल तेज है। फिलहाल सचिन पायलट ने अपने अनशन में मंत्रियों और विधायकों को दूर रहने के निर्देश जारी किए हैं। लेकिन सचिन ने उन्हें यह जरूर का है कि अनशन यादगार वाला बने इसमें उनकी भूमिका उनके क्षेत्र से आने वाले कार्यकर्ताओं पर भी निर्भर होगी।
सचिन पायलट का अनशन शहीद स्मारक पर मंगलवार को होगा जहां पर कार्यकर्ता सुबह से ही एकत्रित होना शुरू हो जाएंगे और 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक अनशन का समय निर्धारित किया है। अनशन में ना कोई नारे लगेंगे और ना ही कोई भाषण बाजी होगी। कार्यकर्ताओं और नेताओं को स्पष्ट कहा गया है कि वे अपनी शालीनता के साथ अनशन करेंगे और सरकार को वसुंधरा के खिलाफ जांच करने के लिए अपनी मांग रखेंगे।
ऐसा माना जा रहा है कि अनशन निश्चित तौर पर विशाल होगा और उसके माध्यम से सचिन पायलट अपना शक्ति प्रदर्शन कर यह दिखाने का प्रयास करेंगे कि उनमें दमखम है। सचिन पायलट के निवास पर सोमवार को सुबह से देर रात तक अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को इस बात की सूचना देने का सिलसिला बरकरार रहा कि धरने में जयपुर आना है। यह माना जा रहा है कि धरने में जयपुर, दोसा, टोंक, सवाई माधोपुर, अजमेर, भरतपुर, करौली सहित विभिन्न जिलों से अच्छी तादाद में कार्यकर्ता मंगलवार को धरना स्थल पर आएंगे।
कहने को तो सरकार ने धारा 144 लगा रखी है लेकिन धरना होगा और धारा 144 भी टूटेगी। सरकार का फिलहाल कोई शक्ति करने का इरादा नहीं है। ऐसा भी माना जा रहा है कि प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा सचिन पायलट को मनाने के लिए सुबह उनके निवास स्थान पर जा सकते हैं। दिल्ली से अभी तक सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका की ओर से कोई संदेश सचिन पायलट तक नहीं पहुंचा है। लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में इस बात की हलचल तेज है कि आखिर सचिन पायलट का अब आगे का कदम क्या होगा ?
कांग्रेस के प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा के बयानों से ऐसा लगता है कि वह खुद को रखकर राजस्थान में रणनीति बना रहे हैं। वह कहते हैं कि उन्होंने भी पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटवाया था लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे और उपमुख्यमंत्री ही बनना पड़ा था। और सचिन पायलट को सलाह दे रहे हैं कि अभी तो युवा है समय बाकी है उन्हें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्हें पार्टी ने बहुत कुछ दिया है और मौजूदा संकट के समय में उन्हें पार्टी में इस तरह की गतिविधियां नहीं करनी चाहिए। लेकिन वे यह भी कहते हैं कि मैं प्रयास करूंगा कि किसी तरह से सचिन पायलट माने और अनशन नहीं करें। लेकिन सचिन पायलट ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जो वादे हुए थे उन्हें पूरे किए जाएं नहीं तो वह अपनी रणनीति के तहत जो कुछ करना है करते ही रहेंगे।
सचिन पायलट ने ट्वीट कर इतना ही लिखा है कि मन में खुशी, चेहरे पर मुस्कान, हर दिल में बसता है यहां राजस्थान का स्वाभिमान। इस संदेश का अर्थ भी कई मायनों में राजनीतिक तौर पर निकाला जा रहा है। अब चाहे कुछ भी कहो लेकिन हाईकमान को अपनी पुरानी बातों को याद कर कोई निर्णय जरूर करना पड़ेगा।
राहुल गांधी को लेकर 13 अप्रैल को सूरत में सुनवाई और फैसला भी हो सकता है। ऐसे में धरने के बाद क्या कुछ निर्णय होगा अभी कुछ कहना सही नहीं होगा। लेकिन यह बात सही है कि सचिन पायलट ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के भ्रष्टाचार को लेकर जो मांग उठाई है उसे निश्चित तौर पर केंद्रीय नेतृत्व को भी विचार करने के लिए विवश कर दिया है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अभी तक कोई इस बारे में अपना बयान नहीं दिया है। लेकिन उनके मंत्रिमंडल के सदस्य राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने इतना जरूर कहा है कि मुख्यमंत्री 1 फुट की दीवार बनाते हैं और सचिन पायलट 2 फुट की दीवार तोड़ देते हैं। ऐसे में पार्टी में जिस प्रकार का संदेश जा रहा है उसे निश्चित तौर से पार्टी को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सचिन पायलट का समर्थन करते हुए लिखा है कि कैबिनेट में इस बात को उठाया जाएगा।