


प्रदेशभर के निजी चिकित्सकों की राइट टू हेल्थ (आरटीएच) बिल पर मंगलवार कोडॉक्टर्स और सरकार के बीच 8 मांगों पर समझौता हो गया है। मुख्य सचिव उषा शर्मा से बैठक के बाद इस पर फैसला किया गया। अब निजी चिकित्सकों की हड़ताल कभी भी समाप्त होने का ऐलान किया जा सकता है।
ऐसा कहा जा रहा है कि समझौते के बाद भी डॉक्टर्स मंगलवार को अपने निर्धारित महारैली निकाल रहे हैं।
50 बिस्तरों से कम वाले निजी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पतालों को आरटीएच से बाहर कर दिया है। सभी निजी अस्पतालों की स्थापना सरकार से बिना किसी सुविधा के हुई है और रियायती दर पर बिल्डिंग को भी आरटीएच अधिनियम से बाहर रखा जाएगा।
निजी चिकित्सकों और सरकार के बीच समझौते में निम्न बातों पंडित ने किया गया है। निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पीपीपी मोड पर बने अस्पताल सरकार से मुफ्त या रियायती दरों पर जमीन लेने के बाद स्थापित अस्पताल (प्रति उनके अनुबंध की शर्तें), अस्पताल ट्रस्टों द्वारा चलाए जाते हैं(भूमि और बिल्डिंग के रूप में सरकार द्वारा वित्तपोषित)को शामिल किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए पुलिस मामलेऔर अन्य मामले वापस लिए जाएंगे।अस्पतालों के लिए लाइसेंस और अन्य स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होगा। फायर एनओसी नवीनीकरण हर 5 साल में करवाया जाएगा। नियमों में कोई और परिवर्तन, यदि कोई हो, आईएमए के दो प्रतिनिधियों के परामर्श के बाद किया जाएगा